Sunday, September 6, 2026

मिलाप

मिलाप

तेरे मिलाप से दिल को अजब करार मिला,
बिछड़ के भी जो न मिला, वो आज प्यार मिला।

बहुत दिनों से थी आँखों में एक प्यास-सी,
तेरी नज़र जो मिली, दिल को इंतज़ार मिला।

न लफ़्ज़ निकले, न कोई सवाल ही आया,
ख़ामोशियों में मगर दिल को इकरार मिला।

तमाम उम्र जिसे ढूँढ़ता रहा था मैं,
वो एक पल में मुझे मेरा ही संसार मिला।

— शांडिल्य

Thursday, September 3, 2026

वक्त

हर बात का हिसाब लिए जा रहा है वक्त,
ख़ामोश है मगर ये जिए जा रहा है वक्त।

ठहरा नहीं कभी किसी रहगीर के लिए,
आँखों के सामने से बहे जा रहा है वक्त।

ज़ख़्मों पे इक मुसाफ़िर की मानिंद चुपके से,
मरहम भी ख़ुद ही अपने धरे जा रहा है वक्त।

पहचानता नहीं है अमीरी-ग़रीबी को,
सबके नसीब तय ही किए जा रहा है वक्त।

कल क्या था, आज क्या है, ख़बर तक नहीं मिली,
किस मोड़ पर हमें ये लिए जा रहा है वक्त।

#शांडिल्य

Tuesday, September 1, 2026

कशिश है कयामत है शामत है तिरी शर्मीली आँखो मे
की मचल जाती है जान-ए-तलब तिरी नीली आँखो मे

बहकने को बहुत है बहाने जाँ-ए-जिगर तिरी साँसो मे
मगर ठहर जाता हूँ सुबहो शाम तिरी नशीली आँखो मे

डूब जाने की परवाह  किसे है जानिब सफर है इश्क मे
मगर हम तो तैरते रहते है शीशे सी चमकीली आँखो मे

#शांडिल्य

Monday, August 31, 2026

ओढ़नी जब लहराती है हवा के संग,
लगता है जैसे मौसम गुनगुनाता है।

कभी रंगों में सिमटती है कोई चाहत,
कभी चेहरे पर आकर शर्माती है।

उसकी हर सिलवट में छुपी है कहानी,
जो बिना कहे भी दिल को समझाती है।

ओढ़नी सिर्फ़ कपड़ा नहीं होती,
किसी की यादों की खुशबू बन जाती है।

#शांडिल्य

Saturday, August 29, 2026

दिल ने जब भी तुझे चुपके से पुकारा है,
तेरी यादों ने मुझे आकर सँवारा है।

दूर होकर भी तू दिल से कहाँ दूर हुआ,
तेरा एहसास ही जीने का सहारा है।

रात तन्हा हो तो आवाज़ तेरी आती है,
जैसे खामोश फ़िज़ाओं ने पुकारा है।

जिसे दुनिया ने समझा था मेरा ख़्वाब कभी,
वही ख़्वाब आज भी दिल को प्यारा है।

#शांडिल्य

Friday, August 28, 2026

बिसात पर मोहरे सभी बराबर लगते हैं,
वक़्त की चाल चले तो रिश्ते बदलते हैं।
राजा भी यहाँ अपनी चाल में मजबूर है,
प्यादा बढ़ता रहे तो मंज़िल दूर नहीं।

कुछ चालें जीत देती हैं, कुछ सबक दे जाती हैं,
शतरंज की तरह ज़िंदगी भी चालें सिखाती है।
हार से घबराना नहीं, खेल अधूरा मत छोड़,
कभी एक छोटी-सी चाल भी बाज़ी पलट जाती है।

#शांडिल्य

Sunday, August 16, 2026

महेंदी

हथेली पर जब तेरी मेहंदी का रंग आया,
दिल ने फिर कोई पुराना ख़्वाब सजाया।

तेरे नाम की लकीरें जो उभर आईं,
चाँद ने भी शरमा के अपना चेहरा छुपाया।

महकी-सी हर साँस, हर पल हुआ हसीन,
तेरी मेहंदी ने जैसे मौसम महकाया।

रंग गहरा हुआ तो दिल ने ये कहा—
तूने चुपके से मुझे अपना बनाया।

#शांडिल्य

Friday, August 14, 2026

वो पहली-सी अब दिल में चाहत नहीं रही,
तेरे बिना भी जीने की आदत नहीं रही।

जो बात तेरी आँखों में पढ़ लेते थे कभी,
अब आँखों में वो पहले-सी शरारत नहीं रही।

हमने भी छोड़ दी है तेरा इंतज़ार अब,
दिल में किसी के लौटने की हसरत नहीं रही।

कल तक जो ज़िंदगी थी तेरे नाम से मेरी,
अब उस कहानी में कोई आहट नहीं रही।

#शांडिल्य

Tuesday, August 11, 2026

खुशबूदार चहेरा

चाँदनी रातों में दिखता है तेरा खुशबूदार चेहरा,
दिल को फिर याद आ जाता है वो खुशबूदार चेहरा।

एक नज़र पड़ते ही मौसम महकने लगता है,
फूल भी शर्मा के कहता है—ये खुशबूदार चेहरा।

दूर होकर भी मेरी साँसों में रहता है सदा,
याद बनकर मुस्कुराता है वो खुशबूदार चेहरा।

जिसको देखा तो मोहब्बत हो गई बेइंतहा,
मेरी दुनिया का सहारा है वो खुशबूदार चेहरा। 

#शांडिल्य

Thursday, August 6, 2026

तस्वीर बोलती है

तस्वीर बोलती है,
बिना शब्दों के भी बहुत कुछ कहती है।
वक़्त की धूल में छिपी यादों को,
धीरे-धीरे फिर से जी लेती है।

हर मुस्कान का एक मौसम होता है,
हर आँख में कोई कहानी रहती है।
जो लफ़्ज़ कभी होंठों तक न आए,
तस्वीर उन्हें भी चुपचाप कहती है।

#शांडिल्य

Tuesday, August 4, 2026

पहली बारिश

जब पहली बारिश धरती पर उतरी,
मिट्टी की खुशबू साँसों में बिखरी।

भीगे पत्तों ने गीत सुनाया,
हर सूने मन को हँसना सिखाया।

हर बूंद में उम्मीद का उजियारा था,
पहली बारिश में जैसे नया सवेरा था।

#शांडिल्य

Monday, August 3, 2026

झलक

तेरी एक झलक ने दिल में उजाला कर दिया,
सूने से हर ख़्वाब को फिर से हरा कर दिया।

पल भर का साथ था, मगर ऐसा असर हुआ,
बीते हुए लम्हों को भी फिर से जगा दिया।

अब हर दुआ में बस तेरा ही नाम है,
एक झलक ने ज़िंदगी का रंग बदल दिया।

#शांडिल्य

Saturday, August 1, 2026

हर एक ख़ामोशी में छिपा एक सवाल है,
दिल की हर धड़कन का यही हाल है।

जवाब ढूँढ़ते-ढूँढ़ते उम्र बीत गई,
वक़्त के हाथों कैसा ये कमाल है।

कुछ सवाल आँखों से भी कहे जाते हैं,
लब ख़ामोश हों तो भी ख़याल है।

मोहब्बत का हिसाब कौन कर पाया,
हर जवाब के पीछे नया सवाल है।

#शांडिल्य

Friday, July 31, 2026

मोहब्बत का दिया दिल में जलाना सीख लेते हैं,
अँधेरों में भी हँसकर मुस्कुराना सीख लेते हैं।

तेरी यादों की खुशबू साथ चलती है सफ़र भर में,
तेरे बिन भी तुझे हर पल निभाना सीख लेते हैं।

न कोई शर्त, न शिकवा, न कोई फ़ासलों का डर,
जो सच्चा इश्क़ करते हैं, निभाना सीख लेते हैं।

#शांडिल्य

Wednesday, July 29, 2026

पतझड़ ने फिर शाख़ का श्रृंगार ले लिया,
मौसम ने हँसते फूलों का प्यार ले लिया।

गिरते हुए पत्तों ने इतना सिखा दिया,
हर हार ने जीने का अधिकार ले लिया।

सूनी-सी राह में भी उम्मीद चल पड़ी,
बसंत ने दिल में फिर से घर कर लिया।

कल फिर नई कोंपलें मुस्कुराएँगी यक़ीनन,
कुदरत ने हर पतझड़ में बहार भर दिया।

#शांडिल्य

Tuesday, July 28, 2026

डायरी में आज फिर कुछ ख़्वाब लिखता हूँ,
अपने दिल के हर धड़कते बाब लिखता हूँ।

जो किसी से कह न पाया उम्र भर खुलकर,
उन सभी जज़्बात का हिसाब लिखता हूँ।

कुछ हँसी के फूल हैं, कुछ दर्द की बारिश,
हर सफ़े पर ज़िंदगी की किताब लिखता हूँ।

जब भी तन्हाई मुझे चुपचाप छू जाती,
मैं उसी पल अपना पूरा हाल लिखता हूँ।

#शांडिल्य

Thursday, July 23, 2026

सपनों की रोशनी में सफ़र हो गया,
हर एक ख़्वाब दिल का असर हो गया।

रात ने चुपके उम्मीद बोई थी जब,
सुबह का हर नज़ारा बशर हो गया।

हौसलों से जो सींचा था अरमान को,
वो अधूरा भी इक दिन शजर हो गया।

सपने सच हों, यही है दुआ उम्र भर,
ज़िंदगी का यही तो हुनर हो गया।

#शांडिल्य

Sunday, July 19, 2026

तुम्हारी बातों में इक सुकून-सा मिलता रहा,
हर लफ़्ज़ दिल के ज़ख्मों को सिलता रहा।

जब भी ख़ामोशियों ने घेरा मुझे,
तुम्हारा ज़िक्र ही हौसला बनता रहा।

मुलाक़ात हो या बस यादों का सफ़र,
तुम्हारी बातें दिल में महकती रहीं।

#शांडिल्य

Sunday, July 12, 2026

रातों के सन्नाटों का शोर हूँ
मरघट का मौन अघोर हूँ मैं

मृत्यु की कोख से हूँ जन्मा
चिता की राख में हूँ मैं रंगा

नाद हूँ मैं शिव के डमरू का
जंगल में जीवंत अघोर हूँ मैं

श्रापों का मैं श्रृंगार करता
मोक्ष के मार्ग का अघोर हूँ मैं 

#शांडिल्य

Friday, July 3, 2026

मुकम्मल हर कहानी हो, ज़रूरी तो नहीं,
हर ख़्वाब को मिल जाए मंज़िल, ज़रूरी तो नहीं।

कुछ रिश्ते अधूरे होकर भी दिल में बसते हैं,
हर प्यार का अंजाम मिलन हो, ज़रूरी तो नहीं।

जो मुस्कुराकर दर्द सह ले, वही सच्चा इंसान है,
हर अश्क का दिख जाना, ज़रूरी तो नहीं।

#शांडिल्य