Thursday, July 31, 2025

एक अजनबी से मुलाकात हुई 
धीरे-धीरे कुछ_बात हुई 

अल्फाज़ बयां उसने जो किये 
दिल को वो मेरे छू से गए।

जादू सा जैसे छाने लगा 
सपनों में अब वो आने लगा
निगाहों को अब वो भाने लगा...

#शांडिल्य

Tuesday, July 29, 2025

कुछ बातें हमसे सुना करो,
कुछ बातें हमसे किया करो,

मुझे दिल की बात बता डालो
तुम होंठ ना अपने सिया करो,

जो बात होंठों तक ना आए
वोह निगाहों से कह दिया करो,

कुछ बातें कहना मुश्किल है
तुम चेहरे से पढ़ लिया करो,

#शांडिल्य

Monday, July 28, 2025

एक शोर सुनाई देगा 
मन का चोर दिखाई देगा

तुम रुकना नही 
तुम झुकना नही

तुम चलना कुछ ऐसे 
नदियाँ चलती हो अंचल से जैसे

तुम थकना नही 
तुम बहकना नही

तुम लिखना मन से मन को 
जैसे मीरा लिखती है वृन्दावन को..!!

#शांडिल्य
दो तन एक प्राण 
प्रणय का करें दोनों मान सम्मान। 

प्रेम का यही श्रृंगार 
अलंकार और उपहार ।

वादा हो जैसा राम ने किया सीता से 
एक पत्नी व्रत निभाऊं जीवन भर तुमसे। 

नहीं जो किया दुष्यंत जैसे 
भूल जायें किया वादा शकुन्तला से ।

#शांडिल्य

Saturday, July 26, 2025

प्रणय का बंधन है पवित्र
दो अनजान बनते मनमीत
मेरे शब्द तेरे स्वर मिलकर
बन जायें जीवन संगीत

सुर्ख गुलाब प्रतीक है
सुख के शबाब के साथ
दुखों के काटों का वादा है,
मिलकर समस्याएं सुलझाने का

प्रणय का करते इजहार
वादों, कसमों से इकरार
कि वादा है जीवन भर 
रहेगा मधुर व्यवहार

#शांडिल्य

Thursday, July 24, 2025

सुमन सरीखी याद तुम्हारी,
केवल यूँ हीं स्वीकार नहीं
इस एक धरोहर के सम्मुख,
जँचता कोई उपहार नहीं

तेरे गीतों को गाने से,
यह हदय कमल खिल जाते हैं
तन्हाई की परछाईं में,
हमतुम दोनों मिलजाते हैं 

बातें होती हैं नयनों से,
जब अधर-अधर सिल जाते हैं
यह विरह-मिलन का महाकुंभ,
अब समझेगा संसार नहीं

#शांडिल्य

Tuesday, July 22, 2025

महकी-महकी याद तुम्हारी अनुरागी मन में ।
छलक पडे़ आँखों से आँसू अगन लगी तन में।।

ताक रहा विरहाकुल-व्याकुल आयेंगे बादल।
नेह राग की पाती पाकर गायेंगे बादल।।

उतर गगन से चाह बिजलियाँ चमकी आँगन में।
महकी-महकी याद तुम्हारी अनुरागी मन में।।

#शांडिल्य

Monday, July 21, 2025

घटपट नवल धवल
मृदुल मधुर विचार प्रवाह
स्नेहिल व्यवहार तरंगिनी
सकारात्मकता ओज अथाह

स्वच्छ स्वस्थ अंतर काय
कदम चाल मंगलता ओर
जीवन पथ प्रतिक्षण
अनुभूत अनंत अनुराग

दिग्दर्शन सृजन आरेख
दिव्यशब्द अर्थ पराग
अभिस्वीकृत आराध कामना
मनोभूमि परम आनंद ठोर
पद्मजा श्री चरणों में,अरुणिम भोर

#शांडिल्य

Friday, July 18, 2025

बन के चितचोर कोई आये तो 
कोई मेरा भी दिल चुराये तो

जान हम भी हैं प्यार के काबिल
बात कोई ये मान जाये तो

वास्ते मेरे भी घरौंदा इक
अपने दिल में कोई बनाये तो

कोई रूठे भले मेरे से पर 
जब मनाऊँ मैं मान जाये तो

हाथ बढ़ कर के थाम ले  मेरा
मेरा जब जब पाँव लड़खड़ाये तो

#शांडिल्य

Thursday, July 17, 2025

एक आस हृदय लिए, और अधरों पर प्यास।
प्रेम शब्द का हे सखे, पढ़ रहा मैं इतिहास ।

प्रेम जाल में फँस गया, यह पागल मन मोर।
चित्त चुराकर ले गया,वह प्यारा चितचोर।

तुम हो मेरी प्रेरणा, तु ही हो मेरा प्यार।
तेरी सुधि में खो गया, मेरा दिल यूँ बिमार।

#शांडिल्य

Wednesday, July 16, 2025

यूँ रंगीन कहानी हो तू मेरी दीवानी हो।  
तब मैं राजा कहलाऊँ जब तू मेरी रानी हो।   

काश वो दिन भी आ जायें रोज़ाना मनमानी हो।  
मन फूलों सा खिल उठ्ठे ऐसी भी शैतानी हो।

तू ही छेड़ ग़ज़ल कोई फिर महफ़िल मस्तानी हो।  
जब भी बिछड़ें हम इन आँखों में पानी हो। 

#शांडिल्य

Tuesday, July 15, 2025

लेकर अंगड़ाई भोर आई
न ख़्वाब तेरा न नींद आई

तूने मेरी यू निंदिया उड़ाई
जिधर देखू  नज़र तू आई

पल में मेरी, पल में पराई
सब तेरे लफ्ज़ो की चतुराई

अगन कैसी दिल मे लगाई
तुझ बिन सोचे न कोई पाई

#शांडिल्य

Saturday, July 12, 2025

सृजन सुहाने सभी हों, सरस सु-सौंदर्य भी हों।
सु-मधुर कल्याण-कारी, भुवन भरे.. भाव धारी॥

कृति अपनी कामना से, शुभ रखता भावना से।
कुशल सरोकार..जो है, पटु..रचना-कार वो है ॥

सजग सु-निर्माण भाते, हृदय..क्षुधा बाँध पाते।
कुशल सरोकार ध्यावें, प्रभु सत-उद्धार भावें॥

#शांडिल्य 

Sunday, July 6, 2025

आओ किसी का यूँही इंतजार करते हैं,
चाय बनाकर फिर कोई बात करते हैं!

उम्र सांठ की हो गई हमारी,
बुढ़ापे का इस्तक़बाल करते है!

कौन आएगा अब हमको देखने यहां,
एक दूसरे की देखभाल करते है!

जिंदगी जो बीत गई बीत गई,
बाकी बची मैं फिर से प्यार करते हैं!

#शांडिल्य

Friday, July 4, 2025

मनभावन से भाव सृजन का 
अनुपम गीत बन गई तुम..!

छेड़ा मन का वाद्ययंत्र 
एक सुर संगीत बन गई तुम..!

सुघड़ प्रीत का थाल सजाये 
ड्योढ़ी पर ही ठिठकी हो,

उर-पट खोल बलैयां लेलूँ
सांची मीत बन गई तुम..!

#शांडिल्य

Wednesday, July 2, 2025

कुछ न कहा कभी आपने, हमने फिर भी सुन लिया ।
इन हजारों चेहरों में, एक तुम्हें बस चुन लिया ।।

आपके खातिर हम जिए, आपके खातिर ही मरे।
हमने कुछ सोचा ही नहीं, दुनिया से अलग हम क्या करें।।

फूल कई हैं गुलशन में, एक तुम्हें बस चुन लिया ।
कुछ न कहा कभी आपने, हमने फिर भी सुन लिया ।।

#शांडिल्य

Tuesday, July 1, 2025

प्रेम की असीमता तुम्हें स्पर्श करती हुई 
मेरे रोम रोम को भिगो रहीं हैं 

मन के भाव शांत तुमसे आबद्ध 
हृदय का आलिंगन कर रहीं हैं 

मुक्त स्वर  से अपने नाम में 
सदा तुम्हें पुकार रहीं हैं 

जीना है एक जिंदगी जहां संग तुम हो 
मेरी एक यात्रा है जिसका अंत तुम हो 

#शांडिल्य