Saturday, November 29, 2025

प्रेम,
रंग नहीं, पानी नहीं,
उजाला नहीं, अँधेरा नहीं,
ताप नहीं, शीतलता नहीं,
सुगंधा है सिर्फ अनुभूति भर के लिए

प्रेम
साँस नहीं, धड़कन नहीं,
चेतना नहीं, स्पर्श नहीं,
स्पन्दन नहीं, अभिव्यक्ति नहीं,
देह नहीं - सिर्फ आत्मा है
परम तृप्ति और मोक्ष के लिए।

#शांडिल्य

Friday, November 28, 2025

महक जाऊं तेरी जिंदगी के हर खुशनुमा लम्हे में 
काश मैं तेरे हाथों की मेहंदी में रचा बसा होता

धड़क जाता दिल मेरा तेरे आने की आहट से
काश मैं तेरे पैरों की पायल सी झंकार होता

खनकता रहता तेरे दिल मे हर पल हर लम्हा
काश बन के हरी चूड़ियां मैं तेरी कलाई में होता

#शांडिल्य

Wednesday, November 26, 2025

करीब आई तो तेरी बाहों में बिखर जाऊँगा
सीने  से गर लगाई तो तेरी रूह में उतर जाऊँगा मैं

मुझसे मेरे मुहब्बत की इंतहा ना पूछो,
होठो से लगाई तो सांसो से पिघल जाऊँगा मैं.

कैसे में बताऊ की तुम मेरे लिए क्या हो...
अपना अगर बनाई तो तेरे इश्क़ में हद से गुजर जाऊँगा मैं 

#शांडिल्य

Tuesday, November 25, 2025

एक चेहरा है जो मेरे ख्वाब सजा देता है 
मुझे खुश रहने की वो एक वजह देता है 

वो मेरा कौन है, मालूम नहीं लेकिन 
जब भी मिलता है अपने पहलू में जगह देता है 

मैं जो कभी अंदर से टूट कर बिखरूं तो वो
मुझे थामने के लिए अपना हाथ आगे बड़ा देता 

#शांडिल्य

Sunday, November 23, 2025

लौट के वापस आ जाओ मनमीत 
ऋतु बसंत में मत दो मुझको 
पतझड़ का आभास 
दे जाओ सुधियों की ख़ातिर 
मृदुल मधुर एहसास 

मुझको रचने हैं जुल्फों पे
अधरों पे कुछ गीत 
लौट के वापस आ जाओ मनमीत 

संग तुम्हारे खिल उठते थे
उपवन के सब फूल 
कंकर पत्थर माटी तो क्या 
जी उठते थे शूल 

#शांडिल्य

Saturday, November 22, 2025

जुबां मौन है पर नजर बोलती है,
दबे दिल के राज सहज खोलती है ।

कभी पास बैठो निहारो इन नजर को,
ए बिना शब्द के भी गजब बोलती है ।

निहारो गे जितना इन आंखो मे मेरी,
मुहब्बत मे उतना ए शहद घोलती है ।

मिले जब नजर तो पलक ना गिराना,
दिल से ए दिल की हर डगर डोलती है ।

#शांडिल्य

Thursday, November 20, 2025

तुम्हारी याद में आँसू बहाए भी छुपाए भी,
नहीं अब रास आते हैं ये मौसम ये उजाले भी।

चरागों से अगर रौशन हुआ करता किसी का दिल,
पतंगे क्यूँ भला फिर इस तरह ख़ुद को मिटाते भी।

मुहब्बत की इज़ाज़त हो तो ये अपराध हम कर लें,
भले ही रूठ जाएँ अब जहाँ के लोग सारे भी।

#शांडिल्य

Tuesday, November 18, 2025

मुस्कुरा के सदा घर से निकला करें
खुशियां देनी खुशबू उड़ाया करें।

आज महका खिला कल भी महका रहे
दिल को शुक्राने में झुकाया करें।

धड़कनें साज छेड़े मुहब्बत का फिर
सांसों में खुशबू अपनी मिलाया करें।

आंखें हंसती रहें चेहरा खिलता रहे
दिल को अब अपने ऐसे सजाया करें।

#शांडिल्य

Sunday, November 16, 2025

न आतिश है,न कोई धुआं है,
फिर भी क्यों  झुलस रहा हूँ।

ज़िंदगी लाख बचाया फिर भी,
तुझसे क्यों कर उलझ रहा हूँ।

न तो मोम थी न धागा कोई,
पर कतरा कतरा पिघल रहा हूँ।

उधेड़बुन के शौक से,ये हश्र हुआ,
तार तार हो के बस उधड़ रहा हूँ।

मीलों चला मंज़िल तेरी तलाश में,
पहुंचा नहीं बस,घिसड़ रहा हूँ।

ज़िंदगी तुझे समझने की कोशिश में,
लम्हा लम्हा ही,बिखर रहा हूँ।

छुई मुई सा वज़ूद है मेरा,
मत उठा उँगली मेरी ज़ानिब,
ख़ुद ही अपनी हया में,सिकुड़ रहा हूँ,

#शांडिल्य

Wednesday, November 12, 2025

उम्मीद है जिंदगी से,  
कुछ राहत देगी ग़मों से,  
या खुशी भी लाएगी साथ में।  

हर कदम सिर्फ परीक्षा ही नहीं,  
सहानुभूति भी दिखाएगी,  
सिर्फ भयभीत ही नहीं करेगी,  
साथ में मुस्कुराएगी।  

और वादा है जिंदगी से अनकहा सा,  
कोई आलोचना नहीं,  
सभी सह लेंगे  
बिना शिकायत किए,  

चाहे कुछ भी हो,  
चाहे अनुकूल हो,  
चाहे प्रतिकूल लगे।  

उम्मीद से शुरू हुआ है सफर ये,  
आशा है, पूरा कर पाऊँगा।  

#शांडिल्य

Tuesday, November 11, 2025

सरस सृजन की संगिनी हो प्रीत का प्रसार तुम 
अनुरक्त हृदय की रागिनी हो स्वप्न का सँसार तुम 

कुमुद कोमल कामिनी हो प्रणय की पुकार तुम 
मुक्त मुग्ध मंदाकिनी हो मन्मथ की मनुहार तुम 

चपल चँचल चाँदनी हो वैभव का विस्तार तुम
सदा शुभ्र सुहासिनी हो अनंग का अवतार तुम 

#शांडिल्य

Monday, November 10, 2025

जब चाहे देख लो 
तुम्हारी याद में आँखों से
अश्क नहीं बहते है बस आत्मा की पिघलती है...

लिखना चाहता हूँं
तुम पर और अपने इश्क पर एक किताब...

पर कुछ ऐसे डूबे हैं
तुम्हारे खयालों में
कि एक लफ्ज भी  नहीं  लिख पाते...

#शांडिल्य 

Sunday, November 9, 2025

अगन में मगन हो के मन सो गया 
हमने सोचा था कुछ, और कुछ हो गया

सुंदर सौम्य सघन घन में मंजुल मृदुल मुखर मन में 
मादक मदिरा मुस्काती प्रीत चपल चंदन वन में 

त्रस्त ताप तपते तन में तर्से तृप्ति तड़ित त्रण में 
निष्ठुर सांसों के व्यतिक्रम कर्म दोष ज्यों जीवन  में

#शांडिल्य

Thursday, November 6, 2025

जीवन के कुछ अनमोल पल पन्नों के अंदर थे बंद
लिखे हुए तुम्हारे वह छंद लगे मुझे जैसे मकरंद

पोर-पोर झंकृत किया उस बिसरी हुई बात ने
मन मेरा अलंकृत किया स्मृतियों के मलय बहार ने

उन दिनों को ढूंढता हूं मै हरदम ख्वाबों खयालों में
सागर सा था शांत मैं और निर्झर सी चंचल तुम

लिखने बैठूं तेरे बारे में शब्द कम पड़ जाते हैं
कुछ समझ नहीं आता क्यों अधर मौन हो जाते हैं।

बांधे रखा है मुझे तुमसे उन स्मृतियों के भंवर जाल ने
सुवासित मुझको कर दिया स्मृतियों के मलय बयार ने।

#शांडिल्य

Wednesday, November 5, 2025

नशीली आँखों से
तुम मुझे देखती हो
आँखों से मुझे तुम
अपना बना लेती हो
दुनिया को भुला कर तुम
आग़ोश में मुझे छुपा लेती हो
ये कैसी उलझन हुई
जो सुलझती नहीं मुझसे
उलझता हूँ तुमसे
फिर भी उलझता नहीं
साँसे तेज हुई जा रही
और धड़कन करती शोर
थाम ले मुझे अब तू
मुझ पे कहां मेरा जोर

#शांडिल्य

Monday, November 3, 2025

मीत मेरे ! 
तुम्हारे व्यक्तित्व की सादगी ने
हर पल मुझे आकर्षित किया।
तुम्हारे आचरण की सभ्यता ने
हर क्षण मुझे प्रभावित किया।
तुम्हारी निश्छलता ने प्रतिक्षण
अंतर्मन को मुग्ध किया।
तुम्हारी पावनता ने प्रतिपल
आत्मा का स्पर्श किया .!!
तुमसे एक अप्रतिम,अटूट 
बंधन में बंध गया हूं।
तुमसे मेरा ये पवित्र बंधन
आजीवन सिर्फ़ मेरा है।
तुम्हारे बिना मैं स्वयं की
कल्पना भी ना कर पाऊंगा।
तुमसे विलग होकर अब
कहां जी पाऊंगा ..!!

#शांडिल्य

Sunday, November 2, 2025

न जाने क्या बात है तुम्हारे हर अंदाज में
अजीब सी कशिश है तुम्हारे इस शबाब में

तेरी #सांसों की हरारत से पिघल जाऊं न कहीं 
तुम समा गये हो मेरी हर #धड़कन हर #सांस में 

तेरे दीदार की तलब लाजिमी है ऐ मेरे सनम
तेरी #धड़कन भी हुई शामिल मेरी आवाज में..