Monday, December 30, 2024

याद आती रही शब्द जुड़ते गए
नाम लिखता रहा गीत बनता गया

एक चेहरा टँगा रहा चाँद सा
काफिला तारों का गुज़रता गया

दूरियाँ न हटीं चाहतें न घटीं
प्यार का सिलसिला यूँ ही चलता रहा

तेरे मिलने की उम्मीद रही सुबह तक
मैं भी करवट पे करवट बदलता रहा

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, December 29, 2024

रूप-यौवन, मदन वेग छाया हुआ
दूध-केशर से मल-मल नहाया हुआ।

ये बदन भीगा बरखा में,लगता है यूँ।
खूब फ़ुरसत में रब का बनाया हुआ।

ये कमल पांखुरी तन,सरिता-कटि,
दृष्टि उतराये ,गहरी लगे घाटियाँ ।

कहीं मैले न हो,पाँव छू कर ज़मीं,
मरमरी-बाँहों में 'गर,घिरे वादियाँ ।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, December 20, 2024

बिते लम्हों को यूं तो हम भुला देते हैं
जब भी याद आते है मुस्कुरा देते हैं

झड़ने लगते है अहसासों के सुमन
यादों की टहनी जब भी हिला देते हैं

तन्हाई में भी तन्हा फिर होते नहीं हम
सहरा में भी शुकून का मेला लगा देते हैं

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, November 28, 2024

क्या लिखूं कैसे लिखूं लिखना जरूरी है
आईने को सामने रखना जरूरी है

राह खुद ब खुद मंजिल बन जाएगी
एक बार तेरा प्यार में पडना जरुरी है

पछताएगा एक दिन समय जाएगा बीतl
बौराए हैं आम तो सजनी जरुरी है

निश्चित ही मिल जाएगी मंजिल मगर
जीवन का लंबा सफर चलना जरूरी है...!!!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, November 24, 2024

तेरे दिल में थोड़ी पनाह चाहता हूं
ए सनम मोहब्बत बेपनाह चाहता हूं

तुझे पा सकुं, ऐसी तकदीर मिल जाए
तेरी रहनुमाई में उम्र बीत जाए

दर्द ए मोहब्बत से निजात चाहता हूं
प्यार की एक बरसात चाहता हूं

हर रस्म की एक गांठ चाहता हूं
ताउम्र के लिए सांठगांठ चाहता हूं

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, November 15, 2024

चाँद से फिर जा मिलेगी देखना
रात आख़िर जग पड़ेगी देखना

नींद कच्ची रात की होती बहुत
साथ ही चलती रहेगी देखना

रात हरदम ढूँढती है चाँद को
हर फ़साना मिल कहेगी देखना

क्यूँ अमावस रात होती बाँवरी ?
चाँद बिन तनहा कटेगी देखना

जब जमीं पर चाँद की किरणें पड़ें
रात की बाँछें खिलेगी देखना

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, November 7, 2024

कितने मेरे पास हो तुम
सबसे मेरे खास हो तुम
विस्मृत सारे दृश्य हो गए
कितना सुंदर एहसास हो तुम

मै अकिंचन खड़ा हुआ
द्वार पे तेरे अड़ा हुआ
आतुर..छवि को निहारूँ मै
कितना मनमोहक आभास हो तुम

दृग कितने हैं चंचल तेरे
हिय में करते हलचल मेरे
मदमाते अधरों पर रक्त वर्ण
मुखड़ा, लिए सुहास हो तुम

शीत ऋतु सा शीतल मन है
गर्माहट में पुरवाई पवन है
वासंती बयार लिए 
दिखते प्यारा मधुमास हो तुम

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, November 5, 2024

चल आज फिर बैठते हैं
शीतल आम की छांव में
कुछ तुम कहना कुछ हम
गौर से सुनना उन चिड़ियों
की चहचाहट में...
कौवे की कांव कांव में
और पास फुदकती
उस मैना की शर्माहट में
उस गाँव की सौंधी मिट्टी में
जो हमसे बहुत दूर छूट गई है।।
याद है न हम कितना लड़ते थे
इसी पेड़ की कसम खाकर

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, November 3, 2024

मैं अमलतास, तू गुलमोहर,
दोनों का रूप निराला है!

मैं कुन्दन सा चमकता हूँ,
तो तू अग्नि की ज्वाला है!!

सूरज की जितनी तपिस होगी,
उतना ही रूप निखरेगा!

जब भी ग्रीष्म का आगमन होगा,
रूप दोनों का बिखरेगा!!

ज्येष्ठ की तपती दोहपरी में,
हम शीतलता के प्रतीक होंगे!!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, October 29, 2024

प्यार की धार को जीवन का प्राणाधार कर दो तुम,
नज़र के तीर को..मेरे जिगर के पार कर दो तुम।

कई जन्मों के..गूंगे भाव..जो मन में समाए हैं,
उन्हें वाणी का रस देकर मेरा उद्धार कर दो तुम।

अधर प्यासे हैं सदियों से जाएगा कब अधूरापन,
बहार बन कर छा जाओ मधुर बौछार कर दो तुम।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, October 27, 2024

ज़िंदगी मुश्किल बड़ी पर मुस्कुराना सीख ले 
ये नहीं मुश्किल तू सबको ये बताना सीख ले 

आयेंगी यहाँ आँधियाँ तूफ़ान भी हर राह में 
पर अडिग हो राह में तू जीत जाना सीख ले 

पलकों के कोरों में तू आँसू छिपाना सीख ले 
ज़िंदगी छोटी बहुत पर गुन गुनाना सीख ले 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, October 22, 2024

हिम्मतसे बढ़ती है ताकत
एकजुटता से बढ़ती एकता
प्यार बढ़ता साझा करनेसे
परवाह से बढ़ती एकरूपता
छू ना पायेगा कोमल हृदय
किसीके भी कठोर शब्द
छू जाएंगे कठोर हृदयभी
हँसमुख तेरे कोमल शब्द
पढ़सकते हो तो दर्द पढ़ना
किसीके भी दिलके भीतर
शान्त सा दिखने वाला लगे
कितने दर्द समेट रखे हमने 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, October 20, 2024

राधा के होंठ
गुनगुनाते फाग
बांसुरी मौन।

राधा का गीत,
नाच रहे मोहन,
कुंज दें ताल।

प्रेम का रंग,
राधा और मोहन,
एक रंगे हैं।

कृष्ण रंग हैं,
गोरी  राधारानी जी,
श्याम हो गईं।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, October 19, 2024

मेरी बंदगी बस तुम्हीं हो फ़क़त
तेरे नाम ये ज़िन्दगी हो फ़क़त

न जाऊं कहीं इश्क़ की आस में
अगर साथ ये आशिक़ी हो फ़क़त 

सितारों नज़र तुम न आना अभी
हमें आरज़ू चाॅंदनी हो फ़क़त

बुलाओ बहारों मेरे यार को
के इस बाग़ में दिल्लगी हो फ़क़त

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, October 16, 2024

धड़कती धड़कनें भी रहीं उदास कल रात।
झपकती पलकों में था इक क़यास कल रात।

सुलगते रहे सपने आँखों में भोर तलक,
थपथपाती रही खिड़की बरसात कल रात।

उनसे कल रात ना हो सकी  गुफ्तगूँ,
झरझराती रहीं बूंदें चुपचाप कल रात।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, October 13, 2024

ढलती शाम सी जिंदगी है तुम बिन मेरी,
कुछ पल साथ दो तो यादों में उतर जाऊं।

मेहमान हूं बस कुछ ही दिनों का मैं तेरा,
साथ बैठो तो कुछ पल ही मैं संवर जाऊं।

मिलते है मुश्किलों से अरमान दिल के कभी,
अरमान है कि आज एक शाम ही ठहर जाऊं।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, October 11, 2024

कुछ कहते है नयन तुम्हारे 
जब वह झुके झुके होते
हम भी समझे उस भाषा को
आंसू खूब रुके होते।।

झर झर बहते आंसू जब
नयनो को खूब भिगोते है
खुशी अगर हो या फिर गम हो
हर पल में ही रोते है ll

सपने देखे सुंदर सुंदर
देखे पर सोते सोते
कुछ कहते है नयन तुम्हारे
जब वह झुके झुके होते।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, October 7, 2024

त्रिकुटी बीच बिंदु शोभित
ठगें से दो नयन! 

उलझ रहे पिय नयन से
लज्जित होकर मौन!! 

तुम जीवन अभिसार सखी
रूप अनूप सहचरी सी!! 

पग कोमल कोमल हृदय
मुदित मन पिय घर चली!! 

नयन मीन भौह अति सुंदर
जिसमें राजित पिय की मूरत!! 

अधर सुधारस ऐसे पागे
मधुशाला की सुरा से लागे! ! 

~~~~ सुनील #शांडिल्य

Friday, October 4, 2024

हुआ प्यार मुझको,ये वो जानती है,
मोहब्बत को लेकिन,वो नही मानती है

वो मोहक अदा से,सितम ढ़ा रही हैं
कटि की लचक से,मुझे लचका रही है

घट भर जल रख,प्यास बढ़ा रही है
घट नीर पिऊँ,या नैनो की मदिरा
समझ मुझको लेकिन,नही आ रही है

बस बस कर, अब बस भी करो जी
ये अवरोध दिन रात,देती जा रही है

~~~~ सुनील #शांडिल्य

Wednesday, October 2, 2024

जिश्म की तुम मेरी कोई 
अनमिट कहानी नहीं हो

आँखों से हुई तुम मेरी कोई 
सुन्दर नादानी नहीं हो

अल्ल्हड़, मदमस्त सरित सी 
बहती रवानी नहीं हो

आँखों से बरसता हुआ 
प्रेम का तुम पानी नहीं हो

तुम मेरे जीवन का वसंत हो
पतझड़ की निशानी नहीं हो..!!!

~~~~ सुनील #शांडिल्य

Friday, September 27, 2024

मदहोश करती अदायें, मयकदे से गुजरे ऐसे
जाम तेरे नयनों के, मयकदा तेरी मदहोशी

इश्क के समुंदर में, वो डुबकियां थीं ऐसी
वापस जो आना चाहें, लहरें खींचतीं मोहब्बतकी

भूलकर न भुला पायें, मोहब्बत है तेरी ऐसी
चढ़ी इश्क की मदिरा है, महक तेरे है यौवन की
बेचैनियाँ रात-दिन की, है मोहब्बत तुमसे ऐसी

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, September 24, 2024

देखते ही तुमको मेरा दिल खो रहा हैं
लगता है मुझको तुमसे प्यार हो रहा हैं

किताबो में देखु तो पढ़ता हूँ तुझको
लिखने जो बैठू तो लिखता हूँ तुझको

दीवानो के जैसा मेरा हाल हो रहा हैं
लगता हैं मुझको तुमसे प्यार हो रहा हैं

तेरे आने से लगता हैं दिल धडकता हैं
तेरे हसने से लगता हैं सारी ख़ुशी मिल गयी हैं

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, September 22, 2024

वो सिंदूरी संध्या 
और साथ तेरा

नदी के इस छोर मैं 
उस पार तेरा बसेरा

रवि की डूबती किरणें 
ह्रदयँ में इश्क़ का सवेरा

जल में तैरती नईया 
लहरें करें मिलन तेरा-मेरा

मिलें राहत ऐसी शाम में
चाँद जलें देख इश्क़ मेरा

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, September 13, 2024

चाँद छिपता रहा चाँदनी रात थी
बादलों की वो कोई ख़ुराफ़ात थी.

मौत ने आके घेरा हमें जिस जगह
ज़िन्दगी की वहीं से शुरूआत थी.

मौज़-ए-दरिया ने धोखा दिया पेशतर
वर्ना तूफ़ान क्या तेरी औक़ात थी.

बाद मुद्दत के आई फ़ना हो गई
यूँ ख़ुशी से अधूरी मुलाक़ात थी.

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, September 10, 2024

मैं पतझड़ की अवहेलना‌ कभी नहीं कर पाऊंगा,
बसंत ऋतु के आगमन पे ना मैं कभी इतराऊंगा

अगर पतझड़ ने पुराने पत्ते नहीं गिराए होते,
तो क्या बसंत ऋतु में, नए पत्तों का सृजन हो पाता ?

दुख-सुख की परिभाषाएं कुछ ऐसे ही बना करती है,
दुख के बाद की खुशियां अतुलनीय सी लगती है।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, September 8, 2024

छंद लिखना चाह रहे थे, बंद में उलझ गये।
चेतना के बोल सारे, रेत से फिसल गये।।

भाव, भावना सभी, रित गईं जाने कहाँ।
और हम निष्पन्द से, अवसाद में उलझ गये।।

तुमने कही मैंने सुनी, मैंने कही तुमने सुनी।
बात बात में बढ़ी और, फासले निकल गये।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, September 4, 2024

वो निकल पड़ी है पर्वत से,कुछ चंचलसी कुछ निर्मलसी
सागर से मिलने की आस लिए,वो सूखी धरा भिगोती है

कभी वीररस का उन्माद लिए,कभी श्रृंगारों के सावन में
विरह गीतके बीहड़ में, वो तन्हाई में रोती है

बेचैनी के मरुस्थल में, रेतों का तूफ़ान लिए
एक अनबुझी प्यास है, अश्कों से लबको भिगोती है

~~~~ सुनिल शांडिल्य

Monday, September 2, 2024

धरा धुरी पै घूमकर प्रथा अटल निभा गयी
भानु पथ बदल चला उषा नवल सी आ गयी

शिशिर का प्रशीत कंप हो रहा विरल यथा
आग में अलाव की ताप भी हुआ वृथा

रश्मियां प्रखर हुयीं धूप खिलखिला उठी
हरी-भरी हुयी मही फसल लहलहा उठी

कनक बालियाँ निकल खेत खेत गा रहीं
काश्तकार को सुखद स्वप्न सा दिखा रहीं

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, August 30, 2024

पिछली बात भुला कर नई शुरुआत करते है,
आओ अज़नबी बन कर फिर से हम मुलाकात करते है,

जो याद दिल दुःखाए उसे जला कर राख करते है,
कड़वाहट की धूल झाड़ दिलों को साफ करते है!

फूलों सा महक कर ख़ुशी का इज़हार करते है,
काँटों से भी दोस्ती कर उनका इस्तक़बाल करते है..!

ना होगी कोई शिकायत ,नफ़रत को आज़ाद करते है ,
वही वक़्त और उसी जगह हम आपका इंतजार करते है.!

कह देते है हम_तुम से, तुम भी कह दो ये हमसे ,
एक दूजे की चाहत में, हम और बेइंतहा प्यार करते है..!!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, August 27, 2024

नशीली आँखों का,कौन नहीं कायल
कजरारे नैनो से होते,हर कोई घायल।

चढ़ा इश्क इसपे तू ,प्रीत की चाशनी
दीवाना बनाया हमें बावरा,तू,नाजनी।

रात का काजल है, तू भोर की तहरीर
तु लाली शाम की,मेरे नैनो की तासीर।

करे बातें, नैनो के काजल,जगे हसरत
होती जब तुम खामोश,लेती रुखसत।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, August 25, 2024

मुहब्बत निभाने के, दिन आ रहे हैं,
सनम पास आने के, दिन आ रहें हैं।

सफ़र आपसे है, हमारा मुक़म्मल,
कि वादे निभाने के, दिन आ रहें हैं।

बड़ा ख़ूबसूरत समाँ, आजकल का,
दिलों की सुनाने के, दिन आ रहें हैं।

सनम हुस्न पर, तुम न इतराओ इतना,
ये घूँघट हटाने के, दिन आ रहें  हैं।

दिलो जान से हमने, चाहा है तुमको,
यही अब बताने के, दिन आ रहें हैं।

चुराओ न हमसे, नज़र अब तो जानम,
निगाहें_मिलाने के, दिन आ रहें हैं।

भला इतना, ग़ुमां क्यूँ है उनको,
उन्हें आज़माने के, दिन आ रहें  हैं।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, August 24, 2024

नज़र को नज़र से मिलने तो देते।
मुहब्बत की शम्मा तुम जलने तो देते।।

ए कैसा कहर तुमने ढाया है मुझपर।
दिल को तुम दिल से मिलने तो देते।।

ए सोहरत ए दौलत नहीं देखी जाती।
निगाहें करम तुम गर करने तो देते।।

है नज़रें मिलाना बस तुमसे है साकी।
मयखाने में आने औ मिलने तो दे देते।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, August 14, 2024

मेरी मिन्नत है खुदा तुमसे, कि उनसे आंखें चार हो।
प्यार मिले या ना मिले, पर उनका ही दिदार हो।

मलमली दुपट्टा के नीचे, रेशमी कुर्ती औ सलवार हो।
गुलाबी होंठ, कमर पतली, लंबे बाल,नयन तलवार हो।

अदा हो बादलों जैसी नजाकत चाँद-सी चटकार हो।
इस पार हम,उस पार वो मचलती, बीच में मझधार हो।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, August 12, 2024

दूर क्यों बैठे गुमसुम होकर,
मन में मत शरमाहट लाओ

ग़लतफ़हमी हम दूर करेंगे 
ग़र अनजानी आहट लाओ

माना मौसम सर्द हुआ पर, 
दर्द -ए-दिल क्यों सहमा-२

महफ़िल में है शोर शबनबी,
मधुबन में नरमाहट लाओ

सुनो हवाओं सर-सर चलकर,
कानाफूसी बंद करो तुम,

मेरा मन तो भावों से भीगा,
तन में कुछ गरमाहट लाओ

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, August 8, 2024

माह भर तुझसे परे रहकर हुआ निष्प्राण कविते
भेंट ले भर अंक मुझको,भर पुनःनव प्राण कविते

भावनाओं की सदा तूँ संगिनी निःस्वार्थ कविते
तूँ हृदय में पल रहे हर भाव में निहितार्थ कविते 

पूर्णतः असहाय था मैं, पूर्णतः निरुपाय भी था
ज्यों रहे होंगे कभी गाण्डीव के बिन पार्थ कविते

सत्य है! तुझ बिन हमारा शून्य है परिमाण कविते!
भेंट ले भर अंक मुझको भर पुनः नव प्राण कविते!

तूँ अबोली है भले ही बोलते  हर शब्द कविते!
इस जगत को निज तुला में तोलते हर शब्द कविते!

अनकही मन की कथाएँ रह गयीं थीं जो हमारी
पट उन्ही अभिव्यक्तियों के खोलते हर शब्द कविते!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, August 1, 2024

मैं चला था द्वंद लेकर मौन अपने संग लेकर
पहली पंक्ति में खड़ा था अनगिनत संबंध लेकर

स्वयं में सम्पूर्ण होकर संघर्ष से परिपूर्ण होकर
राग लेकर द्वेष लेकर कुछ नया परिवेश लेकर

बोलते पेड़ों को लेकर टूटती लहरों को लेकर
मैंने समझा मैं ही अविरल मैं धरा पर श्रेष्ठ हूं

दान और अभिमान मैं ही सृष्टि का वरदान मैं ही.
पाप के फूटे घड़े में सामर्थ्य भरता पुण्य हूँ
शिखर पर बैठा अकेला सतह पर मैं शून्य हूँ, 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, July 31, 2024

महज़ इश्क़ नहीं रूह का रिश्ता है तुझसे
तुझे नहीं है यक़ीं तो जाने दे

मेरी हर धड़कन तुझ से मेरी हर सांस में तू
गीतों के बोल तुझ से मेरी कविता के शब्द तू

मेरे वजूद का कारन तू जीने की वजह बस तू
तेरे मन की तु जाने मरने तलक हूं अमानत तेरी
तुझे नहीं है यक़ीं तो जाने दे

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, July 29, 2024

अक्षरों से कुछ  सीखें कैसे निभाते हैं साथ
पाकर नजदीकियां समझाते हैं अपनी बात।

अक्षर टूटकर शब्दों से जब रूठने लगते हैं
भाव अधूरे रह जाते उलझ जाते जज़्बात।

दिल से निकले शब्द नया इतिहास रचते हैं
यही शब्द मरहम बनते कहीं करते आघात।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, July 19, 2024

चन्द्र-वदन मृगलोचनी, सुंदर रूप- स्वरूप! 
चितवत चलत चकोर जस, मुख पर फैली धूप!! 

प्रियतम के रस में पगी,सौम्य सुलभ मुस्कान! 
तकती घूंघट ओट प्रिय, चला नयन के बाण!!

बरूनी की है धार अस, जैसे तीक्ष्ण कृपाण! 
भौहन में गोरी हँसत, चला प्रेम का बाण!! 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, July 12, 2024

सौंदर्य,सुगंधित,अप्रतिम तुम
लावण्य,रूप का, संगम तुम

कुंतल,केश,चपल नयना तुम
साँवली,सलोनी,सबला तुम

रूप,माधुर्य का,मेल हो तुम
तीखे,नयनों का,जाल हो तुम

भीगे होठों के,जाम हो तुम
सरल, सरस,स्निग्धा,हो तुम

प्रेम,त्याग की मूरत हो तुम
लय और ताल की सरगम हो तुम
हे प्रिये ! तुम सबसे,अनुपम हो

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, July 9, 2024

मैं तुम्हारे साथ चलना चाहता हूँ।
तुझमें ही घुल के पिघलना चाहता हूँ।।

कबसे डूबा हूँ ग़मो की झील में मैं।
संग तेरे मैं उभरना चाहता हूँ।।

कबसे बिखरा हूँ जहां में इस तरह से।
तेरि बाहों में सिमटना चाहता हूँ।।

ज़िंदगी तेरे इशारों में चले हम।
अब कहीं रुक कर ठहरना चाहता हूँ।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, July 5, 2024

गुनगुनी धूप जब मुस्कराने लगे।
दिन बहारों के तब पास आने लगे।।

फूल चारों तरफ़ जब सुहाने लगे।
मदभरी गंध तब मन को भाने लगे।।

भीग जाता है जब खेत बरसात में,
तब फ़सल धान की लहलहाने लगे।।

आज महफ़िल में फिर आपको देखकर,
हम ख़यालों में दीपक जलाने लगे।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, July 4, 2024

उदास बैठा था बड़ा गुम सुम.....
तभी याद आये चाय और तुम....

चेहरे पर अनायास मुस्कराहट आ गयी
धीरे से जब तुम्हारी आहट आ गयी....

ये बारिश का मौसम और चाय का प्याला
जैसे कर गया अंधेरे में उजाला....

चाय से उठती वो लहराती भाप
जैसे बादलो में लगा दी आग.....

होंठो से लगी तो सुकून आ गया 
उस पर तेरी मौजुदगी लगा खुदा आ गया.....

बस यूँ ही पास बैठे रहो थोड़ी इबादत होने दो
जिंदगी शुरू होती है तेरे आने से 
और चाय की प्याली के खड़खड़ाने से.....

सोचता हूँ दुनिया बस इतनी रहे......
मैं,चाय और तुम जितनी रहे.......

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, July 1, 2024

तुमसे मेरा जुड़ना जैसे
ढलती रात और नया दिन,
बीता कल और नई सुबह,
स्वाति नक्षत्र और ओस की बूंदे!

तुमसे मेरा जुड़ना जैसे
पौधे से नई कोंपल फूटना
बिन मौसम बारिश का बरसना,

तुमसे मेरा जुड़ना जैसे
गर्म दिन में गुलाबी सी ठंड का एहसास,
ठंडे दिन में गर्म चाय और भुट्टो का स्वाद!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, June 28, 2024

तुमको देखने के बाद फिर चाँद को क्यों देखूं,
चाँद ही कहता गया मैं, अपनी मुहब्बत के चाँद को।

तेरे चेहरे की चमक से चाँद फीका हुआ,
आसमाँ पर चाँद पूरा था,मगर तेरे सामने ये आधा लगा।

सब कहते है तुम्हे वो चाँद का टुकड़ा है,
पर मैं कहता चाँद को वो तेरा टुकड़ा है।

इसीलिए मेरे लब पर ये फरियाद आती है,
चांद को देखकर सनम तेरी याद आती है। 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, June 23, 2024

तेरी रहमतों की बारिश सरेशाम हो गई है
मेरी और तेरी कहानी सरेआम हो गई है

मुझे छोड़कर किसी के अब तुम ना हो सकोगे
दुनिया की तू नजर में मेरे नाम हो गई है

तेरे नाम से है मेरी पहचान अब यहां पर
ये पहचान मेरी खुद की गुमनाम हो गई है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, June 21, 2024

हँसी ख्वाब आँखों में आने की रातें
कोई गीत फिर गुनगुनाने की रातें

कभी रूठ कर फिर मनाने की रातें
तुम्हें अपने दिल में सजाने की रातें

जमाने की नजरों से बचते रहे हम
वही राज सबसे छुपाने की रातें

किसी रोज मिलने बुलाया अकेले
मुहब्बत में ये आजमाने की रातें 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, June 20, 2024

आओ मेरे पास आ,दे दो सुख अनुभूति!
मैने माना आप को,अदभुत प्रेम विभूति!!

बोलो कुछ क्या मन कहे,निष्ठुर कड़ुवे शब्द!
तुम तो जीवन प्रेम का,तुम क्यों हुए निशब्द!!

अहंकार का प्यार से,करूणा,गला न घोट!
तेरी ऐसी वीमुखता,करे ह्रदय पर चोट !!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य 

Tuesday, June 18, 2024

कल-कल करती 
नदिया की धारा सी 
बहती है ज़िंदगी ।

कभी मुड़कर 
पीछे पलटकर नहीं 
आती है ज़िन्दगी ।

नित नव पथ 
वरण करती स्वयं
बढ़ती है ज़िंदगी ।

तट बंध बंधी
कूलों मे सिमटी
वह यहां सभी को
देती है ज़िंदगी।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, June 11, 2024

यही सिलसिला अब चले बस प्रलय तक
निलय नद पुलिन पर बनाया करूँ मैं।

वहीं चाँद आए वहीं चाँदनी हो
प्रणय गान गाएँ मुदित यामिनी हो

घरौंदे वहीं रेत के नित गढेगें। 
लहर के अयन पर उभय नित चढेंगे। 

कभी रूठ जब तू नयन फेर लेना
तुझे चिर निशा तब बनाया करूँ मैं। 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य 

Sunday, June 9, 2024

उसे मेरे बिन जीना आता होगा,
मुझे उस बिन जीना नहीं आता। 

किस तरह गुजारू तन्हा जिंदगी, 
मुझे ग़म में भी पीना नहीं आता। 

गुस्ताखियां गुरूर से हुई है अगर,
तो रिश्तों को सीना नहीं आता। 

मुकद्दर का क्या है बदल जाता है,
सदैव सुहाना महीना नहीं आता। 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य 

Friday, June 7, 2024

चांदनी रात में हुई थी मुलाकात उनसे
धुंधली सी यादें रह गई बस साथ मेरे

कब कहा उन्होंने इश्क है हमें तुमसे
जब पलके झुका ली थी हमसे उसने

हवाओं ने बिखरी जुल्फें उनकी इस कदर
मनको संभाल ना सके वो मुलाकात हुई थी

लूटकर ले गई बैरन,काली घटाओ के संग
छोड़ गए तन्हा मुझको अंधेरी रातके संग

~~~~ सुनिल #शांडिल्य 

Wednesday, June 5, 2024

नयन कटारी लब अंगारी प्रेम की तू जंजीर हो जैसे
रुख पर तेरे लट घुंघराली पिय मिलन की पीर हो जैसे

कजरारे चंचल नैनों में सज काजल भी इठलाता है 
और उस पर पैवस्ता अब्रू आंखों के नाजीर हो जैसे

नथ झूले है नाक पे तेरे झूलती जैसे डाल गौरैया
और नजरों के वार कंटीले दो धारी शमशीर हो जैसे

~~~~ सुनिल #शांडिल्य 

Sunday, June 2, 2024

पीत वसन कुंदन बदन,
मुख चंद्र लजावन हारे हैं 
दंत धवल कपोल कमल,
ज्यों अरुण अधर रतनारे हैं
गज गामिनी चाल चारु चपल,
मधुर सुधा सम वाणी सफल
विशाल नयन चंचल चितवन,
केश घटा घन कारे हैं
श्रृजनहार की अद्भुत रचना,
छवि मोहक देख कठिन रहना
स्वर्ग की कोई अप्सरा जैसी,
देख मुग्ध जग सारे हैं

~~~~ सुनिल #शांडिल्य 

Friday, May 31, 2024

तुम से सजी है ये महफ़िल हमारी
प्रेम है ये तुम्हारी तड़प है ये हमारी

तुम तो व्यस्त हो दुनियां के रंग में
तुम्हारी मोहब्बत नज़्म है ये हमारी

अब मुलाकाते तो हो गई है पुरानी
चांद तारों के संग रात कटी ये हमारी

नहीं कोई शिकवा न शिकायत है तुम से
अब यादें तुम्हारी शोहरत है ये हमारी

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, May 27, 2024

यूँ ही चला चल, रुकना नहीं है
गिरना और संभाला है खुद से
किसी से आशा न करना कहीं पे
उम्मीद में दिल टूटता बहुत है
गिरता और फिसलता बहुत है

यूँ ही चला चल नदियों के जैसा
रुकना नहीं है पर्वतों के डर से
आंधियों में राह खुद से तलासों
सागर से मिलने में चुनौतियां बहुत है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, May 21, 2024

प्रेरणा हो तुम प्रिये, मैं गीत लिखता जा रहा हूं।
साथ मेरी चल पड़ी हो चाहे दुष्कर हो डगर

ढ़ाल बनकर तुम खड़ी हो आएं कितने बवंडर
तुम मेरी पतवार हो मैं नाव खेता जा रहा हूं।

प्रेरणा हो तुम प्रिये मैं गीत लिखता जा रहा हूं।
तुम मेरे जीवन में मधुर मुस्कान बन कर आ गई हो

मैं बेसुरा राग था तुम तान बन कर आ गई हो, 
तुम मेरी हो बांसुरी मैं संगीत बनता जा रहा हूं।

प्रेरणा हो तुम प्रिये मैं गीत बनता जा रहा हूं।
बस गई हो तुम प्रिये तन- मन में मेरे इस तरह

झूमकर मिलती है लहरें सागर में आकर जिस तरह
तुम मेरी हो प्रियतमा मैं मनमीत बनता जा रहा हूं,

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, May 18, 2024

बीते हुए लम्हों की कसक अब तलक प्राणों में है।
उन हालात की ख़ुशबू मेरी सांसो मे है 

धड़कनों की रागिनी में एक लम्हा बज उठा।
एक लम्हा आज तक बातों मे है ख़यालातों मे है।

जो गुज़र जाताहै लम्हा  लौट कर आता नहीं.।
इसलिये इक इक पल का संचय किया यादों मे है।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, May 14, 2024

बार बार संवारता हूं,बारबार बिखर जाती है
ये ज़िन्दगी है,हाथ आती ही नहीं है

इससे कोई क्या रखे उम्मीद
करीब दिखती है मगर,बेवफाई कर जाती है

उम्रभर ढ़ूंढ़ता रहा इसका पता
निगोड़ी साथ रहके भी नज़र नहीं आती है

कभी मिले तो कहना #शांडिल्य याद करता है
ये वो शै है,जो मिलती है तो,जान ले जाती है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, May 11, 2024

ये झूठ है कि ज़िन्दगी से कुछ गिला ही नही,
चाहने वाला कोई शख्स क्यू मिला ही नहीं।।

तमाम उम्र भटकता रहा सफर में ही.......,
मोड़ ही मोड़ मिले ठौर बस मिला ही नही।।

हर कोई खुशबू बनके महकता है गुलशन मे,
मैं ऐसा फूल रहा आज तक खिला ही नही।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, May 9, 2024

उलझे हैं केश जैसे नागिनों का जाल कोई
तिरछी नज़र ये कटार लगने लगी।।

अधरों की लालिमा लजाये सूर्य का प्रताप
झुमके की आभा अनवार लगने लगी।।

दूधिया सा चाँद ढोये जैसे सुरमई साँझ
ओढ़नी भी तन को कहार लगने लगी।।

प्रीत की पड़ी फुहार चढ़ने लगा ख़ुमार,
प्रियतमा भी रति-अवतार लगने लगी।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, May 7, 2024

थक  गये  हम  राही  तेरे  राह में,
खो दिया  सुख चैन तेरी  चाह में।

भूलकर भी हम भूल सकते नहीं,
बखश दो हमें दो कदम पनाह में।

मुश्किल बहुत रहना उनके बिना,
कर दो रहम रख लो हमें छाँव में।

आ गई वो घड़ी कह दूँ मनसीरत,
बाँध लो दायरे में अपनी बाँह में।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, May 5, 2024

हरिक हाल दिल का बताती हैं आँखें
दिलों को दिलों से मिलाती हैं आँखें

जो कल तक गुज़रती थीं नज़रें बचा कर
वो छुप छुप के हमसे लड़ाती हैं आँखें

ज़रा मुस्कुरा कर जो देखा पलट कर
अजब दिल में हलचल मचाती हैं आँखें

समझदारी चलती नहीं इनके आगे
उतर कर ये दिल में नचाती हैं आँखें

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, May 2, 2024

अक्षरों से कुछ सीखें कैसे निभाते हैं साथ
पाकर नजदीकियां समझाते हैं अपनी बात।

अक्षर टूटकर शब्दों से जब रूठने लगते हैं
भाव अधूरे रह जाते उलझ जाते जज़्बात।

दिल से निकले शब्द नया इतिहास रचते हैं
यही शब्द मरहम बनते कहीं करते आघात।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, April 27, 2024

पलक झपकते हुआ करिश्मा ख़ुशबू जागी आंखों में 
साथ हमारे महक उठी है आज बहुत पुरवाई भी 

ये रिश्ता है नाज़ुक रिश्ता इसके हैं आदाब अलग 
ख़्वाब उसी के देख रहा हूँ जिसने नींद उड़ाई भी 

छलनी दिल को जैसे तैसे हमने आख़िर रफ़ू किया 
मगर अभी तक कुछ ज़ख़्मों की बाक़ी है तुरपाई भी 

प्यार-मुहब्बत की राहों पर चलकर ये महसूस हुआ 
परछाईं बनकर चलती है साथ-साथ रुसवाई भी 

उसकी यादों की ख़ुशबू से दिल कुछ यूं आबाद रहा 
मैं भी ख़ुश हूं मेरे घर में और मेरी तनहाई भी

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, April 22, 2024

जाने क्यूँ पागल यहाँ बदनाम है 
इश्क का शायद यही इक’आम है ।
          
सैकड़ों दर्द इक ख़ुशी को भूल कर 
रोते रहना बस यही अन्जाम है ।

खो गयी है आदमी से इन्सानियत
बेवजह तो लगता नहीं इल्जाम है ।

एक घर में एक हम रहते नही
और कहते हैं के देश में एकता है ।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, April 18, 2024

मिलो जब भी,मुस्कुरा दिया करो
हम तुम्हारे हैं,ये जता दिया करो

ग़म से लड़ना ही तो जिंदगी है
हाथ पकड़ हमें, जिता दिया करो

आईना सा लगता है,चेहरा तेरा
सहर के आते ही,दिखा दिया करो

ख्वाब मेरे जग जाते हैं,नींद आते ही
आंचल में अपने,सुला दिया करो

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, April 16, 2024

आकाश से ज़्यादा खाली केवल मन हो सकता है
सागर से ज़्यादा भरा हुआ भी केवल मन ही हो सकता है।
प्रकाश से तेज़ केवल मन ही चल सकता है
और पर्वतों से ज़्यादा स्थिर भी केवल मन हो सकता है।
आज मन की गति को पीछे छोड़ चांद पर हम आ गए 
चलो चांद पर मिल एक आसियां बनाते हैं

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, April 14, 2024

इक चेहरा मुस्काता सा ।
खिली-खिली सी आभा मुख पर,
बहारोँ का रूप चुराता सा ।

चंचल चंचल नैन कँटीले,
गहरे-गहरे नीले-नीले,
समन्दर सा लहराता सा ।

होटोँ पे खिला गुलाब ज्योँ,
छोड़ गया हो अपना आँचल,
गुलाबी रंग बिखराता सा ।

जुल्फेँ हैं ज्योँ श्याम घटायेँ,
उड़-उड़ कर ढँक लेते मुख को,
बदली मेँ चाँद छुपाता सा ।

कोयल के से बोल सुरीले,
बाँध लेती है ऐसे मन को,
झरनोँ के गीत सुनाता सा ।

मन सुन्दर यूँ जैसे पानी,
बादल के चेहरे पर जैसे,
चाँद के भाव जगाता सा ।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, April 10, 2024

प्रेम के रंग में तुम गुलाल 
और हम अबीर हो गये,

कहाँ कुछ पता ही चला 
कब राँझा-हीर हो गये! 

प्रेम का ढाई अक्षर ही 
शाश्वत सत्य है, शांडिल्य 

यही पढ़-पढ़कर तो आज 
हम भी कबीर हो गये!! 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, April 2, 2024

प्रेम अमृत है पिलाने कौन आयेगा।
रास मोहन बिन रचाने कौन आयेगा।

प्रेम की ये बात उद्धव तू क्या जानो,
बात दिल की ये बताने कौन आयेगा

प्रेम में ही डूब कोई ज्ञान पाता है,
बुद्ध बिन यह ज्ञान पाने कौन आयेगा।

प्रेम राधा कृष्ण का संसार क्या जाने,
दीप भीतर का जलाने कौन आयेगा।

ढाई अक्षर प्रेम का पढ़ प्रेम को जानो,
छोड़ मोहन यह पढ़ाने कौन आयेगा।

फूल खिलकर टूटकर जग को हँसाता है,
टूट खुद जग को हँसाने कौन आयेगा।

प्रेम अमृत खान है बस खोदकर देखो,
मत कहे ऐसा कराने कौन आयेगा।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, March 16, 2024

अविरल स्रोतस्विनि-सी तुम
मृदुल-मृदुल,उज्जवल निर्झर
तुम्हारे उर के पावन तट पर
वर नये मिल जाते सत्वर ।।

फैला रही तुम तेज कितना
आज मेरे उर अंतर में
अनुभूत तुमको करने लगा हूं
अब अंतर्मन के गह्वर में ।।

खोल दो तुम मन के पट
मुझे और गहरा उतरने दो
अपने सौंदर्य की छाया में
मुझे भी कुछ निखरने दो।।

जीवन क्या है,मुझे इसका
और सौंदर्य बोध करा दो तुम
मुझे कोई शाश्वत चीज बनाकर
अपने हृदय से लगा लो तुम।।

बनकर अमर प्रेरणा मुझमें 
मेरी आकांक्षाओं को बलवान करो 
मेरी श्रद्धा,भक्ति,प्रीति बनकर
मुझे जग में शक्तिमान करो।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, March 14, 2024

निकली वन से कलिका मृदुला,
जग देख रही मन भाव भरे।

चकि जात रही सकुचात रही,
बहु रूप अनूप  लगाव करे।

कुछ लोग भले कुछ लोग बुरे,
किस भांति  दुराव प्रभाव करे।

दृग काम भरे मन श्याम धरे,
बन लोलुप दृष्टि रिसाव रहे।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, March 12, 2024

अंतस का अंधेरा अमावस की रात से भी गहरा था
निकल न पाए चित्त, उस पर खूंखार यादों का पहरा था

खुले आसमान के नीचे कैद मैं अपनी ही उलझनों में
खुशियों का शोर था बाहर ,पर मैं खुद के अंदर ही ठहरा था।

न जाने ये रात कब शुरू हुई और कब खत्म होगी
बदलते पहर संग आदि मध्य ओर अंत होगी

अपने चांद का इंतज़ार भी नही है मुझको
जल जाऊंगा अगर चांदनी की बरसात होगी।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, March 10, 2024

हिम्मतसे बढ़ती है ताकत
एकजुटता से बढ़ती एकता

प्यार बढ़ता साझा करनेसे
परवाह से बढ़ती एकरूपता

छू ना पायेगा कोमल हृदय
किसीके भी कठोर शब्द

छू जाएंगे कठोर हृदयभी
हँसमुख तेरे कोमल शब्द

पढ़ सकते हो तो दर्द पढ़ना
किसीके भी दिलके भीतर

शान्त सा दिखने वाला लगे
कितने दर्द समेट रखे सागर

~~~~~ #$h@πd!£y@

Friday, March 8, 2024

पावस में जब पयस्विनी का रूप निखरता है 
नभ में वह आवारा चन्दा आहें! भरता है ।।

कभी बादलो में छुपता मायूस मलिन सा चेहरा 
कभी निकल कर श्याम घटा से सलिला पर आ ठहरा

कृष्ण-पक्ष में हो विलुप्त मन ऐसे भी तरसाये 
ज्यों भामिन का कंत अचानक परदेशी हो जाये 

शुक्ल पक्ष में नयी कलासंग दिनदिन बढ़ता है
पावस में जब पयस्विनी का रूप निखरता है 
नभमें वह आवारा चन्दा आहें! भरता है

नीरवता में मौन यामिनी युगयुग प्रणय लखी है 
नभ अटखेली देख इंदु की नदिया भी हरषी है 

एक धरापर एकगगन में साथ मचलते हैं 
कलकल करती सरित और शशि दोनों चलते हैं

शुभ्र चाँदनी सी बाहों में सिंधुगामिनी निखरे
जैसे रमणी की मुख आभा साथ पिया के बिखरे 

निर्जन वीरानों में हिमकर साथ गुजरता है। 
पावस में जब पयस्विनी का रूप निखरता है 
नभ में वह आवारा चन्दा आहें! भरता है।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, March 4, 2024

तुम्हारेे याद की आहट कोई किस्सा बताती है
ये घुलकर साँस में मेरी नई दुनिया सजाती है

तुम्हारी याद ही शायद है वो दीवार, सूनी सी
जहाँ कुछ अक्स दिखते हैं जहाँ परियाँ नहाती हैं

तुम्हारी याद की ख़ुशबू से मेरी आरज़ू महके
महकती है मेरी धड़कन, ये धड़कन भी सुनाती है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, March 2, 2024

दीपक जले भवन में, रहे पतंगा बन में
प्रीत खिच कर लायी उसे जलाया क्षण मैं

जलन का उसे कहाँ था होश
प्यार का चढ़ा हुआ था जोश

गा रही दुनियाँ जिसके गीत
बाँवरे यही प्रीत की रीत

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, February 29, 2024

यूँ ना जाओ हमें छोड़ कर,
मर जाएंगे अकेले दम तोड़ कर।

क्यों हो यूँ तुम खफा मै ना जानता,
दूरी  पर हो खड़े यूँ मुख मोड़ कर।

थोड़ी नाराजगी तुम दो ना सजा,
बातें मन की बता तू दिल खोलकर।

जीना दुश्वार हुआ बिन तेरे सनम,
जल्दी जल्दी चले आओ दौड़ कर।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य 

#highlights

Saturday, February 24, 2024

उलझे हैं केश जैसे नागिनों का जाल कोई
तिरछी नज़र ये कटार लगने लगी।।

अधरों की लालिमा लजाये सूर्य का प्रताप
झुमके की आभा अनवार लगने लगी।।

दूधिया सा चाँद ढोये जैसे सुरमई साँझ
ओढ़नी भी तन को कहार लगने लगी।।

प्रीत की पड़ी फुहार चढ़ने लगा ख़ुमार
प्रियतमा भी रति-अवतार लगने लगी।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, February 18, 2024

दिल में समन्दर सा तुफान लिए
कुछ स्मृतियों के धुन गुनगुना रही

किरणों ने बिखेरा है साज अनहद
सुर लहरी बन तरंगें झिलमिला रही

वक़्त से पहले वक्त का तकाजा था,कि
आसाध्य सांझ की बेला तुझे बुला रही

उठ रहीं लहरें कुछ इस तरह कि मानो
वादियों को भी मचलना सिखा रहीं

उड़ चला मन का पंछी भी अब तो
दिल के टहनियों पर, कुछ ठौर पा रही,

बिठा कर यादों की कश्ती में हमें
"शांडिल्य" पूरी दुनिया की सैर करा रही

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, February 16, 2024

एक चाहत हजार जज़्बातऔर एक तुम..
एक रूह हजार एहसास और एक तुम..

एक मैं हजार किस्से और एक तुम..
दो आँखें हजार सपने और एक तुम..

एक चाँद हजार तारे और एक तुम..
एक रात हजार करवटें और एक तुम..
एक  'हमसफ़र' हज़ार 'ख़ुशी ' बस सिर्फ तुम.....

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, February 13, 2024

तू नहीं तेरी तस्वीर ही सही, मुलाकातें तो होती है
तू कोई जवाब नहीं देती न सही, तुम से मेरी बाते तो होती है

संतुष्ट हो जाता है मेरा दिल ये सोच कर 
तुम मेरी जिंदगी में न सही मगर कहीं तो हो

तभी तो कुछ हवाएँ आकर मुझे ऐसे स्पर्श कर जाती
जैसे लगता तुमने मुझे गले लगाया।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, February 11, 2024

निपट अकेला इस दुनिया में डोल रहा मैं सारस,
तुझ बिन मेरा अरी संगिनी जीवन सूना नीरस।

पार गगन के कहाँ गई तू छोड़ मुझे धरती पर,
कण्ठ मेरा अवरुद्ध हो गया आवाजें दे देकर।

भरे हुए हैं निर्मल जल के नदियाँ और सरोवर,
पर मुझको तो प्यास बुझानी अपने आँसू पीकर।

नींद नहीं आती सपनों की गलियाँ भी अब सूनी,
मुझ विरही की विरह-वेदना बढ़ती हर दिन दूनी।

तड़प-तड़प कर ही कटते अब पल जीवन के सारे,
लगता मन को घेर रहे हैं आ-आकर अँधियारे।

अस्त हुई जाती है अब तो इस जीवन की संध्या,
समय पूर्व ही तोड़ रही दम हो आशाएँ वन्ध्या।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, February 7, 2024

हमारा दिल नहीं लगता तुम्हारे_बिन कहां जायें
कहां खोजे वो नादाँ दिन पता कुछ हो तो बतलायें

चलो किसी गाँव मेँ ठहरें, झटक लें धूप जीवन की
या फिर पुलिया पे जा बैठे हवाएं नम नहर की हों

हाँ बैठे नीम के नीचे जहां कोयल कुहकती हो
भरें मुठ्ठी मेँ कुछ कंकड़ उछालें कम कभी ज्यादा

~~~~ सुनिल #शांडिल्य 

Monday, February 5, 2024

वो बारिश की बूंदे और तेरा बहकना
भीगे आँचल का तेरे सर से सरकना
मुझे बहुत याद आती है।

बागों के कलियों में भौरों का मंडराना
तुझे देख लेने तेरी गलियों से गुजरना
मुझे बहुत याद आती है।

वो छत पर खड़ी होकर गेसुये सुखाना
गलियों से गुजरते तुझसे नज़रे मिलाना
मुझे बहुत याद आती है।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, February 3, 2024

तेरा प्यार तो खुदा की नियामत है
और तेरा गुस्सा भी सौगात है मेरे लिए

माना बेकद्र हैं हम कुछ नहीं तेरे लिए
मगर क्या करे तू ही सबो शाम है मेरे लिए

तेरा प्यार सपनों से जागने नही देता है
और तेरा गुस्सा चैन से सोने नहीं देता है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, February 1, 2024

भाषाओं की दुर्बलता थी कि
शब्दों के अर्थ सीमित रह गए
इसलिए मैंने हमारे मध्य
मौन को संवाद का माध्यम चुना

जहाँ भाषा नहीं,भावनाओं का संवाद होना था 
पर भूल गया मैं कि भावनाओं के 
संप्रेषण के लिए सिर्फ़ मौन नहीं
संवेदना से भरा एक हृदय भी अनिवार्य है
जो मौन को उसी के अर्थ में महसूस करे 

हमारे संवाद की विफलता प्रमाण है कि 
तुम्हारा प्रस्तर हृदय इस संवाद के सर्वथा अयोग्य है
तुम्हें भाषा नहीं, भावनाओं को पढ़ना होगा
तुम्हें शब्द नहीं, अनुभूतियों को गढ़ना होगा।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, January 30, 2024

जब अपनी पलकें भीग गईं
मन उदधि की बूंदें रीत गईं।

क्या सोचा था क्या भोगा है
जग नश्वर है एक धोखा‌ है।

कल ही तो मन के फूल खिले
ना शिकवे थे ना कोई गिले।

मन मंदिर सा सजने को था
जो फूल खिला फलने को था।

अगले पल दिल मिलने को थे
बगिया में गुल खिलने को थे।

दिल दावानल ने तप्त किया
और दहल उठा बेचैन जिया

सुख ने जो घर संसार रचा
उसमें दुख ही बस यार बचा

अंधियारे ने डस लिया प्रकाश
हर पल रहता मौसम उदास

अब जीवन में है ग़म ही ग़म
जो तेल खतम सो खेल खतम

सुख की घड़ियां अब बीत गईं
हम हार गए नियति जीत गई
हम हार गए.....

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, January 29, 2024

अच्छा सुनो
आज साडी पहनने का मन नहीं तुम्हारा
तो मत पहनो जो मन हो वो पहन लो
ये भारी भरकम जेवर भी नहीं पहनने
तो किसने कहा उतार दो
तुम्हारी सादगी ही श्रंगार है

आज बालों को खुला छोडना है
हां तो, लहराने दो न इन्हें हवा में
चूडी भी नही पहननी तो मत पहनो
तुम्हारी हंसी की खनक ही बहुत है
बिन्दी नही लगानी तो मत लगाओ न यार
इतना क्यों सोचना दुनिया को क्या देखना

हर रीति रिवाज से दूर तुम सिर्फ 
मेरी खुशी के लिये सोचो
कि तुम्हारी आंखों की चमक और 
होंठो की खिलखिलाहट देखने 
के लिये कबसे तरस रहा हूं!

अरे ! ये मैं नहीं ये वो कह रहा है
तुम्हारा मन जो आइने में बैठा
हर पल तुम्हें प्यार से निहारे जा रहा है 
और एक तुम हो
कि हर बार उसे अनदेखा, 
अनसुना किये जा रही हो !!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, January 26, 2024

जीवन में अनेक हैं तृष्णाएँ।
तुम्हें मगर..
पाना नहीं चाहता तृष्णाओं सा।
क्या महसूस किया है तुमने भी..
मिलते ही.. खो जाती हैं सब तृष्णाएँ।
स्मृति पटल पर भी
धूमिल पड़ जाती है स्मृतियाँ उनकी।
तुम मिलना.. तो मिलना
मेरे बालों की सफेदी सी..
मेरे चेहरे की झुर्रियों सी..
मेरी बढ़ती उम्र के अनुभवों सी..
मेरे भीतर की संवेदनाओं सी..
क्योंकि पाकर तुम्हें 
होना चाहता हूँ मैं..
मनुष्य और अधिक।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, January 23, 2024

जिसे देखो उसी को 
कुछ न कुछ शिकवा शिकायत है,
जमाना डूबा है इसमें 
नहीं कोई रियायत है।

वो कहते भी नहीं है पहले
अपने दिल में रखते हैं,
मग़र कब कैसे करना है
ये अनबोली हिदायत है।

खुद ब खुद
कितनी उम्मीदें 
लगा रखीं हैं लोगों ने,
हमे लगता है अक्सर
ज़िन्दगी उनकी रिवायत है।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, January 22, 2024

जो लिया था एकदिन तुमने वो प्रण निभाया है,
जन्मे थे जहाँ रामलल्ला वहीं मंदिर बनवाया है 

खत्म हुआ बनवास अब राजतिलक होगा,
गुंजेंगे ढ़ोल नंगाड़े दर्शन भव्य होगा

22_जनवरी_दिन स्वयं भोले का होगा,
लहराएगा भगवा, भारत फिर राममय होगा

होगी प्राण प्रतिष्ठा अमृत सिद्धि योग होगा,
तिथि होगी द्वादशी अभिजीत महूर्त होगा 🚩

पुलकित हुआ हृदय तन -मन हर्षया है,
आ रहे हैं राम अयोध्या भगवा लहराया है 🚩

त्रेता में प्रभु श्री राम शिव को पूजे थे,
कलयुग में शिव-रूप अब राम को पूजेंगे 🚩

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, January 21, 2024

प्रीत की रीत निभा न सको 
तो प्रीत के गीत न गाओ सखी,

प्रीत में हित की सोच रखो 
तो मीत को न भरमाओ सखी।

प्यार तो इक धधकता अंगार है,
हरदम मचलता रहता उर ज्वार है।

इस ज्वार का वार सह न सको,
तो सागर सन्निकट न जाओ सखी।

प्रीत की रीत निभा न सको 
तो प्रीत के गीत न गाओ सखी।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, January 19, 2024

गुजरता हूँ  मैं जब भी सुनसान राहों में
कहीं से आ जाती है कूँहू की आवाज,
हाँ रूक जाते हैं कदम मेरे

मैं निहारता हूँ उस आवाज की तरफ
यूँ लगता है तुमने पुकारा है कहीं से
पर कहीं दिखती तो नहीं तुम

हाँ पर मुझे तो उसमें भी सुनाई देती है 
तुम्हारी ही आवाज हाँ वही तुम्हारी सुरीली आवाज
उस वक्त खो जाता हूँ  उस आवाज में
दूर कहीं पुरानी बातों में

हाँ इन्हीं राहों पे साथ चलने की कसम खाई थी हमनें
एक दूसरे का हाथ थामें सफर पूरा करने की
फिर मैं अकेला क्यों अब इन राहों पर हूँ,

पता है इस आवाज से ही दिल को बहला लेता हूँ मैं
तुम ना सही तुम्हारी यादें तो है
सफर में मैं तन्हा तो नहीं

हाँ यह सफर अनंत का तुम्हारी यादों के साथ
तन्हा है पर सफ़र तन्हा नहीं...

~~~~सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, January 16, 2024

बदन के जेवर न देखे हमने, सदा विचारों को देखते है
लोहार भारी पडा है जिनपे, हम उन सुनारों को देखते है

लिखी न जिसने कोई वसीयत, बुजुर्ग का उठ गया जनाजा
लहू के रिश्तों मे आज दिल पर खडी दिवारों को देखते है

बुलंदियो का जुनून होगा तो, हौसलों पर करो  भरोसा
है झौंपडे खुद गिरा के, छप्पर खडी मिनारों को देखते है 

लूटा के जां चल पडे अकेले, बनी तमाशा हमारी चाहत 
है इश्क कातिल कहे जमाना, फना हजारों को देखते है 

जो मुफलिसी मे हुये है पैदा, चिराग बनकर भी चमके कैसे 
नजर उठाकर वो बुझते दिपक, कभी सितारों को देखते है 

क्यूं रौशनी पर लगा है पहरा, छिपा लिया किसने आज दिनकर 
हुआ अंधेरा है वक्त कैसा, अजब नजारों को  देखते है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, January 13, 2024

आवाज़ों के जंगल में
कान बहरे हो जाते हैं
दिल सुनता है...
बिछड़े प्रीतम के 
दिल की धड़कन का शोर;
जिसमें सुनाई_देती_है,
विरही मन की आस भरी पुकार।
हाँ ! 
आवाज़ों के जंगल में
मैं सुन लेता हूँ
सिर्फ़ तुम्हारी आवाज़।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, January 11, 2024

उदास मनको कही छिपाये रखते हैं
लबों पे झूठी मुस्कान बनाये रखते है

दिलकी हालत कोई क्या समझेगा
मोहब्बत को पलको पे सजाये रखते हैं

जाने वालेको कौन रोक पाया हैं कभी
इंतजार में पलके राहों में बिछाए रखते हैं

टूटे दिल की कहां आवाज सुनाई देती हैं
अहसासों को मन में यूंही दबाए रखते हैं

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, January 10, 2024

इंतज़ार तेरा रहता है,निंद अधुरी है तेरे ख़्वाब के बिना,
याद करके ख्वाबो में, हसीन पलों में तुम्हे खोजता हूं,
दूर से ही तेरी कदमों की ख्वाबों में आहट सुनाई देती है,
और निंद में भी दिल जोरो से धड़क जाता है,
तभी इक ठंडी हवा का झोंका हकीकत में लाता हैं,

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, January 8, 2024

प्यार का ज़ज़्बा भी,क्या क्या ख्वाब दिखा देता है,
अजनबी चेहरों को भी,अपनी महबूबा बना देता है.
मेरे ख्वाबों में है एक तस्वीर,दिल पर लिखा जिसका नाम,
अनदेखी नज़रें,ख्वाबों में मिलने को हैं ये जिया बेकरार,
देखना मेरी इन अंखियों में होगा,बस तेरा प्यार ही प्यार.!!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, January 6, 2024

यूँ आहट न करो ख़्वाब घबरा के छुप जाएंगे
छेड़ो न पलकों को आंखों में चुभ जाएंगे

ऐसी नज़रों से न देखिए हमारी ज़ानिब
वरना लफ्ज़ सीने में ही रुक जाएंगे

शायद वो पत्थर भी ख़ुदा हो जाये
अगर हाथ बन्दगी को उठ जाएंगे

ये जुगनू तो हैं रात के मुसाफिर
सहर होते ही लुक जाएंगे

ले जाओगे भी तो कहाँ इनको
निशान दर्दों के वहाँ छुट जाएंगे

न छोड़ो इन्हें खुले मौसममें
चन्द वरके हैं कागज़ के ये तो फ़ट जाएंगे

कोशिश तुमभी करो हमभी करेंगे
जरा से फांसले हैं जो ख़ुद ही घट जाएंगे

छुपा लो कसकर इन्हें मुठ्ठियों में ही
वक़्त के खूबसूरत जर्रे नहीं तो सरेराह लुट जाएंगे

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, January 5, 2024

एक ग़ज़ल हूँ मैं, साज़ ए दिल पे गुनगुना लो मुझे..
तुम्हारी धड़कन हूँ मैं, सीने में अपने छुपा लो मुझे..

गुलाब का एक महकता फूल हूँ, ज़ुल्फों में सजा लो मुझे..
प्यार का मीठा दर्द हूँ, दिल में अपने बसा लो मुझे..

एक मुस्कुराहट हूँ, होठों पे अपने सजा लो मुझे..
ग़म का आँसू भी हूँ, हँसकर बहा दो मुझे..

दास्ताँ भी हूँ, चाहो तो भुला दो मुझे..
एक सुनहरा सपना हूँ, आँखों में बसा लो मुझे..

कुछ और नहीं, तुम्हारी ज़िन्दगी हूँ मैं,
हँसकर गले से लगा लो मुझे।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, January 4, 2024

धुआं धुआं है फ़िज़ा रौशनी बहोत कम है
सभी से प्यार करो ज़िन्दगी बहोत कम है

हमारे गांव में पत्थर भी रोया करते थे
यहां तो फूल में भी ताज़गी बहोत कम है

तुम गगन पे जाओ तो चांद से कहना
जहां पे हम हैं वहां चांदनी बहोत कम है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, January 3, 2024

कहां हे तु जरा तेरा रूख तो बता ऐ जिंदगी
थाम लु तुझे मैं मेरी सांसो मे तो आ ऐ जिंदगी
ना शरमा युं नव दुल्हन सी तु ऐ जिंदगी,

बन भँवरा सा तुझे ढुँढू हर फूल हर कली
कस्तुरी सी सुंगध तेरी,मेरी ओर बहा ऐ जिंदगी

ना युं तड़पा मुझे,ऐ सुन्दरी तु मृगनयनी,
मौत से होगी एक दिन प्यारी सी मुलाकात

बस कुछ कदमों तक तेरा साथ चाहिऐ
बांहो मे तेरी कुछ पल की पनाह चाहिऐ
दुंगा साथ ता उम्र तेरा ऐ जिंदगी,

करूं मै निर्मल मन की बात सगुन से,
तु हे स्वर्ग सी राह,मुझे हमराही तो बना ऐ जिंदगी

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, January 2, 2024

नव प्रभात है ! सादर वंदन 
सुप्रभात सुखमय हो जीवन
नव विहंग पुलकित है तन-मन 
विसरादो बीते कलुषित पल

नव प्रभात है ! सादर वंदन। 
मंगल बेला शुभ घडी आई
नित नूतन खुशियां संग लाई 
नव विचार सृजित हों हर पल

नव प्रभात है ! सादर वंदन। 
शुभ सोचो शुभ को ही ध्याओ
शुभ संग अपनी प्रीति बढाओ 
शुभ भावों से करो आचमन

नव प्रभात है ! सादर वंदन 
समय चक्र नित घूम रहा है
सजग रहो यह बोल रहा है 
स्वर्ण ताप में बनता कुंदन

नव प्रभात है ! सादर वंदन 
अखिल भारती का है कहना
सजग आत्मा में तुम रहना 
बन जाओ प्रभु के प्रिय चंदन

~~~~ सुनिल #शांडिल्य