Tuesday, December 30, 2025

चाँद भी रात अकेला सफर करता है,
हर सितारा उसकी तन्हाई को पढ़ता है।

कभी बादल ओढ़ लेता है उसकी चुप्पी,
कभी समंदर उसे चुपचाप तकता है।

कोई कहे प्रेम का प्रतीक वो निर्मल,
कोई कहे विरह में तपता हुआ पल।

धरती से दूर, मगर सबका अपना,
हर रात नये ख्वाबों में उतरता है।

#शांडिल्य

Saturday, December 27, 2025

एक रात होगी, कुछ खास होगी,
तेरी मेरी अधूरी मुलाकात होगी।

सितारों की चादर तले बैठकर,
तेरे ख्यालों से रोशन हर बात होगी।

एक रात,एक बात लिखूंगा,
तेरे संग अपने जज़्बात लिखूंगा।

ठंडी हवाओं की सरगम में,
तेरी हंसी का संगीत लिखूंगा।

#शांडिल्य

Friday, December 26, 2025

भींगे नयन पोल खोलते
मन में आकुलता बाकी है

व्यथित हृदय है, सूनी आँखें
थोड़ी व्याकुलता बाकी है

संदर्भ पुराने छूट गये
तृष्णा मन में बाकी है

नश्वरता को ढ़ूँढ़ेगा मन
एक मृगतृष्णा बाकी है

मरुभूमि में फूल खिला दूँ
मन की प्यास अभी बाकी है

#शांडिल्य

Thursday, December 25, 2025

पुरुष भी पवित्र प्रेम चाहते हैं! 
जिस्म की ख्वाहिश नही होती जिन्हें,
दिल के एहसास चाहते हैं।

हर वक्त आलिंगन न हो प्रेम में,
कुछ दिल के जज़्बात चाहते हैं। 

ज़रूरी नही नज़रे ख्वाहिश जताएं करीब आने की,
बस कुछ प्यार से लबरेज़ अल्फ़ाज़ चाहते हैं।
हर वक़्त झगड़ना नहीं चाहते है 

#शांडिल्य

Tuesday, December 23, 2025

सुनो ना.... 
वो मेरे अंदर जगह बना रही है ऐसे 
लहराती नदी सागर में सिमट रही है जैसे

मेरी कलम, अब मेरी ही बात मानती नहीं
मेरे अल्फाज सिर्फ उसके लिए ही लिखते हों जैसे

मैं उस शोख महबूबा की आँखों में नहीं देख पाता
मुझे लगता है, मैं उनमें ही डूब कर कही खो जाऊंगा जैसे

#शांडिल्य

Thursday, December 18, 2025

दर्द का कतरा कतरा पी कर
ख़्वाब न जाने कितने देखें हैं

रातों के स्याह सन्नाटों में
कई लोग टूटते देखें हैं

यूँ ही नहीं ये आँसू छलका है
हर रोज़ तमाशे देखें हैं

नींद की स्याही खो-खो कर
कुछ जज़्बात डूबते देखें हैं...

#शांडिल्य

Tuesday, December 16, 2025

नैनो मे भरकर चांद के दीदार की हसरत 
आसमान को एकटक निहारती वो रात
गुमसुम सी खामोश सी .वो रात

ओढ़कर अंधेरे की स्याह चादर
चाँद का इन्तजार करती वो रात
गुमसुम सी खामोश सी वो रात

बावरी है निरी पगली है शायद
नही पता उसे ये बात
रोज रोज कब होती है पूनम सी वो रात

#शांडिल्य

Sunday, December 14, 2025

ऐसा नही कि हम को मोहब्बत नही मिली...
जैसी चाहते थे हम को वो उल्फत नही मिली..!

मिलने को ज़िन्दगी में कई हमसफ़र मिले मुझको
पर उनकी तबियत से अपनी तबियत नही मिली..!

बनाने को हम भी बना लेते अपनी आदत किसी को..
मगर अफ़सोस कि किसी से मेरी आदत नही मिली..!

#शांडिल्य

Saturday, December 13, 2025

टूटे हुए ख़्वाब कहीं चुभ न जाएं आंखों में,
बड़े एहतियात से मसलना इन पलकों को,
बड़े चुगलखोर होते हैं, ये नामुराद अश्क़ भी,
कहीं ज़ाहिर न कर दें तेरी गम_ए_दास्ताँ को,
बड़ा संभाल के रखना इन अश्कों को।
जब तक सीने में हैं तेरे हैं,
बाहर निकलते ही बेगाने हो जाएंगे,

#शांडिल्य

Thursday, December 11, 2025

चलो जिंदगी खूबसूरत बनादूं
मुहब्बत के फूलों की खुशबू बनादूं

महक जाये तेरी,महक से ये दुनियां
तुझे ऐसी सुरभित पवन मै बनादूं

जिसे ढूढते ढूढते,तू गई थक
तुझे तेरी वो आज मंजिल मिलादूं

मधुर मीत हूँ तेरी दुनियांका शायद
मधुरता का तुझको मै सागर बनादूं
चलो जिंदगी खूबसूरत बना दूं

#शांडिल्य

Monday, December 8, 2025

सुनो प्रिय

एक बार प्रिय तुम 
आ जाना,
मधुर मिलन को आतुर है मन,
अधरों की मुस्कान 
जगा जाना,

बंधन मन का आलिंगन हिय का,
प्रेम सुधा बरसा जाना,
एक बार प्रिय तुम आस 
जगाने आ जाना,

बाट निहारु सदा तुम्हारी,
अपलक सजल नैनो से,
आंसू का एक मोती बनकर
प्रेम स्पर्श दे देना,

#शांडिल्य

Saturday, December 6, 2025

ख्याल कुछ
भीगे भीगे से हैं
मन की ज़मीन भी गीली  है

लगता है
आज फिर से 
यादों की फुहारें बरसी हैं। 

ज़िन्दगी
मीठी-मीठी सी है
मन में भी है मिठास घुली

लगता है
होठों ने आज फिर
तेरे नाम की मिश्री चख ली है...

आज हवाओं में 
फिर से मुझको 
एक पहचानी महक मिली है...

शायद तेरे साये को
छूकर
हवा कहीं से गुजरी है...

#शांडिल्य

Friday, December 5, 2025

आ मिलो न तुम करो अपने प्रेम का तुम बारिश 
भींगे हम दोनों तृप्त हो उठे प्यासा तन।

करो तुम अपने प्यार की बारिश 
भींग सके हमारा अतृप्त मन।

मैं प्रेम का सागर दिलवर 
नदी बन तुम मुझमें समझाओ

जीवन में मेरे स्वागत है तुम्हारा 
मेरे प्यासे दिल ने तुझको है पुकारा। 

#शांडिल्य

Thursday, December 4, 2025

भुलाकर 
सारे दर्द और ग़म ज़िन्दगी के
एकबार फिर से नादान होना चाहता हूँं... 

मुस्कुराहटों के 
उन्मुक्त गगन में 
परिंदा अंजान होना चाहता हूँं...

भूलकर उदासियां और तकलीफों के किस्से....
कुछ पलो के लिए गलतियो में
गुमनाम होना चाहता हूँ.....

#शांडिल्य

Monday, December 1, 2025

प्रेम एक शब्दकोश होता है
जो जोड़ता है रिश्तों के एक एक पन्ने को
जिसकी हर पंक्ति सराबोर होती है
स्नेहिल एहसासों से,
हर शब्दों में निहित होता शब्दों का भाव
आत्मीयता के उद्गार से सजी एक एक कविता
खींचती है अपनी ओर।
आत्मीयता और संवेदना से अभिभूत अनुभूति
जिसे हम प्रेम कहते हैं।

#शांडिल्य

Saturday, November 29, 2025

प्रेम,
रंग नहीं, पानी नहीं,
उजाला नहीं, अँधेरा नहीं,
ताप नहीं, शीतलता नहीं,
सुगंधा है सिर्फ अनुभूति भर के लिए

प्रेम
साँस नहीं, धड़कन नहीं,
चेतना नहीं, स्पर्श नहीं,
स्पन्दन नहीं, अभिव्यक्ति नहीं,
देह नहीं - सिर्फ आत्मा है
परम तृप्ति और मोक्ष के लिए।

#शांडिल्य

Friday, November 28, 2025

महक जाऊं तेरी जिंदगी के हर खुशनुमा लम्हे में 
काश मैं तेरे हाथों की मेहंदी में रचा बसा होता

धड़क जाता दिल मेरा तेरे आने की आहट से
काश मैं तेरे पैरों की पायल सी झंकार होता

खनकता रहता तेरे दिल मे हर पल हर लम्हा
काश बन के हरी चूड़ियां मैं तेरी कलाई में होता

#शांडिल्य

Wednesday, November 26, 2025

करीब आई तो तेरी बाहों में बिखर जाऊँगा
सीने  से गर लगाई तो तेरी रूह में उतर जाऊँगा मैं

मुझसे मेरे मुहब्बत की इंतहा ना पूछो,
होठो से लगाई तो सांसो से पिघल जाऊँगा मैं.

कैसे में बताऊ की तुम मेरे लिए क्या हो...
अपना अगर बनाई तो तेरे इश्क़ में हद से गुजर जाऊँगा मैं 

#शांडिल्य

Tuesday, November 25, 2025

एक चेहरा है जो मेरे ख्वाब सजा देता है 
मुझे खुश रहने की वो एक वजह देता है 

वो मेरा कौन है, मालूम नहीं लेकिन 
जब भी मिलता है अपने पहलू में जगह देता है 

मैं जो कभी अंदर से टूट कर बिखरूं तो वो
मुझे थामने के लिए अपना हाथ आगे बड़ा देता 

#शांडिल्य

Sunday, November 23, 2025

लौट के वापस आ जाओ मनमीत 
ऋतु बसंत में मत दो मुझको 
पतझड़ का आभास 
दे जाओ सुधियों की ख़ातिर 
मृदुल मधुर एहसास 

मुझको रचने हैं जुल्फों पे
अधरों पे कुछ गीत 
लौट के वापस आ जाओ मनमीत 

संग तुम्हारे खिल उठते थे
उपवन के सब फूल 
कंकर पत्थर माटी तो क्या 
जी उठते थे शूल 

#शांडिल्य

Saturday, November 22, 2025

जुबां मौन है पर नजर बोलती है,
दबे दिल के राज सहज खोलती है ।

कभी पास बैठो निहारो इन नजर को,
ए बिना शब्द के भी गजब बोलती है ।

निहारो गे जितना इन आंखो मे मेरी,
मुहब्बत मे उतना ए शहद घोलती है ।

मिले जब नजर तो पलक ना गिराना,
दिल से ए दिल की हर डगर डोलती है ।

#शांडिल्य

Thursday, November 20, 2025

तुम्हारी याद में आँसू बहाए भी छुपाए भी,
नहीं अब रास आते हैं ये मौसम ये उजाले भी।

चरागों से अगर रौशन हुआ करता किसी का दिल,
पतंगे क्यूँ भला फिर इस तरह ख़ुद को मिटाते भी।

मुहब्बत की इज़ाज़त हो तो ये अपराध हम कर लें,
भले ही रूठ जाएँ अब जहाँ के लोग सारे भी।

#शांडिल्य

Tuesday, November 18, 2025

मुस्कुरा के सदा घर से निकला करें
खुशियां देनी खुशबू उड़ाया करें।

आज महका खिला कल भी महका रहे
दिल को शुक्राने में झुकाया करें।

धड़कनें साज छेड़े मुहब्बत का फिर
सांसों में खुशबू अपनी मिलाया करें।

आंखें हंसती रहें चेहरा खिलता रहे
दिल को अब अपने ऐसे सजाया करें।

#शांडिल्य

Sunday, November 16, 2025

न आतिश है,न कोई धुआं है,
फिर भी क्यों  झुलस रहा हूँ।

ज़िंदगी लाख बचाया फिर भी,
तुझसे क्यों कर उलझ रहा हूँ।

न तो मोम थी न धागा कोई,
पर कतरा कतरा पिघल रहा हूँ।

उधेड़बुन के शौक से,ये हश्र हुआ,
तार तार हो के बस उधड़ रहा हूँ।

मीलों चला मंज़िल तेरी तलाश में,
पहुंचा नहीं बस,घिसड़ रहा हूँ।

ज़िंदगी तुझे समझने की कोशिश में,
लम्हा लम्हा ही,बिखर रहा हूँ।

छुई मुई सा वज़ूद है मेरा,
मत उठा उँगली मेरी ज़ानिब,
ख़ुद ही अपनी हया में,सिकुड़ रहा हूँ,

#शांडिल्य

Wednesday, November 12, 2025

उम्मीद है जिंदगी से,  
कुछ राहत देगी ग़मों से,  
या खुशी भी लाएगी साथ में।  

हर कदम सिर्फ परीक्षा ही नहीं,  
सहानुभूति भी दिखाएगी,  
सिर्फ भयभीत ही नहीं करेगी,  
साथ में मुस्कुराएगी।  

और वादा है जिंदगी से अनकहा सा,  
कोई आलोचना नहीं,  
सभी सह लेंगे  
बिना शिकायत किए,  

चाहे कुछ भी हो,  
चाहे अनुकूल हो,  
चाहे प्रतिकूल लगे।  

उम्मीद से शुरू हुआ है सफर ये,  
आशा है, पूरा कर पाऊँगा।  

#शांडिल्य

Tuesday, November 11, 2025

सरस सृजन की संगिनी हो प्रीत का प्रसार तुम 
अनुरक्त हृदय की रागिनी हो स्वप्न का सँसार तुम 

कुमुद कोमल कामिनी हो प्रणय की पुकार तुम 
मुक्त मुग्ध मंदाकिनी हो मन्मथ की मनुहार तुम 

चपल चँचल चाँदनी हो वैभव का विस्तार तुम
सदा शुभ्र सुहासिनी हो अनंग का अवतार तुम 

#शांडिल्य

Monday, November 10, 2025

जब चाहे देख लो 
तुम्हारी याद में आँखों से
अश्क नहीं बहते है बस आत्मा की पिघलती है...

लिखना चाहता हूँं
तुम पर और अपने इश्क पर एक किताब...

पर कुछ ऐसे डूबे हैं
तुम्हारे खयालों में
कि एक लफ्ज भी  नहीं  लिख पाते...

#शांडिल्य 

Sunday, November 9, 2025

अगन में मगन हो के मन सो गया 
हमने सोचा था कुछ, और कुछ हो गया

सुंदर सौम्य सघन घन में मंजुल मृदुल मुखर मन में 
मादक मदिरा मुस्काती प्रीत चपल चंदन वन में 

त्रस्त ताप तपते तन में तर्से तृप्ति तड़ित त्रण में 
निष्ठुर सांसों के व्यतिक्रम कर्म दोष ज्यों जीवन  में

#शांडिल्य

Thursday, November 6, 2025

जीवन के कुछ अनमोल पल पन्नों के अंदर थे बंद
लिखे हुए तुम्हारे वह छंद लगे मुझे जैसे मकरंद

पोर-पोर झंकृत किया उस बिसरी हुई बात ने
मन मेरा अलंकृत किया स्मृतियों के मलय बहार ने

उन दिनों को ढूंढता हूं मै हरदम ख्वाबों खयालों में
सागर सा था शांत मैं और निर्झर सी चंचल तुम

लिखने बैठूं तेरे बारे में शब्द कम पड़ जाते हैं
कुछ समझ नहीं आता क्यों अधर मौन हो जाते हैं।

बांधे रखा है मुझे तुमसे उन स्मृतियों के भंवर जाल ने
सुवासित मुझको कर दिया स्मृतियों के मलय बयार ने।

#शांडिल्य

Wednesday, November 5, 2025

नशीली आँखों से
तुम मुझे देखती हो
आँखों से मुझे तुम
अपना बना लेती हो
दुनिया को भुला कर तुम
आग़ोश में मुझे छुपा लेती हो
ये कैसी उलझन हुई
जो सुलझती नहीं मुझसे
उलझता हूँ तुमसे
फिर भी उलझता नहीं
साँसे तेज हुई जा रही
और धड़कन करती शोर
थाम ले मुझे अब तू
मुझ पे कहां मेरा जोर

#शांडिल्य

Monday, November 3, 2025

मीत मेरे ! 
तुम्हारे व्यक्तित्व की सादगी ने
हर पल मुझे आकर्षित किया।
तुम्हारे आचरण की सभ्यता ने
हर क्षण मुझे प्रभावित किया।
तुम्हारी निश्छलता ने प्रतिक्षण
अंतर्मन को मुग्ध किया।
तुम्हारी पावनता ने प्रतिपल
आत्मा का स्पर्श किया .!!
तुमसे एक अप्रतिम,अटूट 
बंधन में बंध गया हूं।
तुमसे मेरा ये पवित्र बंधन
आजीवन सिर्फ़ मेरा है।
तुम्हारे बिना मैं स्वयं की
कल्पना भी ना कर पाऊंगा।
तुमसे विलग होकर अब
कहां जी पाऊंगा ..!!

#शांडिल्य

Sunday, November 2, 2025

न जाने क्या बात है तुम्हारे हर अंदाज में
अजीब सी कशिश है तुम्हारे इस शबाब में

तेरी #सांसों की हरारत से पिघल जाऊं न कहीं 
तुम समा गये हो मेरी हर #धड़कन हर #सांस में 

तेरे दीदार की तलब लाजिमी है ऐ मेरे सनम
तेरी #धड़कन भी हुई शामिल मेरी आवाज में..

Friday, October 17, 2025

कुछ लोग कुछ रिश्ते
हमारे हाथों में नही होते
हां हम उन्हे चाहते हैं बहुत
मगर कह नही सकते
बता नही सकते, जता नही सकते
बस अच्छा लगता है
उन्हें आसपास देखना,महसूस करना
हां मुमकिन नही होता उनसे हरबात कहना
मगर एक आस होती है कि
वो कभी मजाक में ही पूछे तो सही
कि तुझे कुछ कहना तो नही

#शांडिल्य

Wednesday, October 15, 2025

दुनिया में किसी हमसफर के बिना जिंदगी अधूरी है
कोई हमसफर पाने की आस में ही जिंदगी गुज़र गई

जब तक रहा इश्क से अंजान न निकली दर से कभी
अब नेक हमसफ़र की तलाश में ही जिंदगी गुजर गई

मेरी ख्वाहिश है उनसे मिलके दिल की बात बताऊंगा
दिल में बनते बिगड़ते,अहसास में जिंदगी गुज़र गई

#शांडिल्य

Tuesday, October 14, 2025

ना किस्से ना बाते
ना वादे ना ही मुलाकातें
कोई याद बाकी नही
कोई चाह अब आधी नही
था एक फरेब वो बस
नासमझी में उसको
खुदा बना दिया
और देखो खुदा बनकर
वो मेरी ही किस्मत मिटा गई
बस एक उम्मीद ही थी
उसे अपना बनाने की
एक रंगीन दुनिया सजाने की
जाने कैसी थी वो रात
एक झटके में सब बदल गया

#शांडिल्य

Sunday, October 12, 2025

बस यूँ ही गुज़र रहा है जो
वो सफर हूँ मैं
मंज़िल से होकर बेख़बर 
भटक रहा हूँ मैं
ग़र मुलाक़ात हो तो बताना
तलाश रहा हूँ मैं
साँसें उखड़ने लगीं हैं अब
यादें भी धुंधली पड़ने लगी हैं 
किस्मत अपनी बनाने को 
अब भी लड़ रहा हूँ मैं।

#शांडिल्य

Wednesday, October 8, 2025

रक्त सी लालिमा के मध्य
सूर्य की किरणें
जब तुम्हारे
सांवले रंग पर पड़ती है
तो यूं प्रतीत होता है
मानो
रक्त का प्रवाह
अपने चरम पर है

और उसमें
तुम्हारा ये श्रृंगार
खुले केश
रक्तिम परिधान
और
फूलों का आभूषण
 
मानो
भोर और संध्या
रंग रहे हो तुम्हे
अपने अरुण में
अपने आवरण में

#शांडिल्य

Monday, October 6, 2025

लय लोच लचकती स्वर लहरी
नीलिमा नयन में थी गहरी
सागर तट व्याकुल हुए किंतु 
लहरें कब तट पर आ ठहरीं

हैं सिंधु किनारे मौन सतत
रत्नाकर होता नहीं पृथक
पर सीप कभी मोती लेकर
तटबंधों तक ना आए चहक

श्रम साहस की जो अमरबेल
लेते वे नर दरिया उढ़ेल
और तोड़ प्रखर भंवरजाल
रत्नों से खेलें प्रबल खेल

#शांडिल्य

Saturday, October 4, 2025

नारी को जान सका कोई न
न कोई पर्वत न कोई सागर
जीवन जीती है धरती सा
मन हो जाये गागर में सागर

अगनित मोती छुपे हुये है
मनकी बहती नदिया में
है किसको फुरसत देखे जो
वक्त के बहते दरिया में

बनती माला जुड़ जुड़ मोती
ढ़ूंढ़ लाता मन डुबकी लगाकर
जीवन जीती है धरती सा
मन हुआ गागर में सागर

#शांडिल्य

Friday, October 3, 2025

राधा नाम का जादू ऐसा
हर दर्द लगे जैसे छोटा सा पैसा
कान्हा जब लेते हैं ये नाम
तो सारा ब्रह्मांड हो जाता गुलाम
राधा की चाहत कृष्ण की मस्ती
इस प्रेम में बसी है गोकुल की बस्ती
जहाँ भी इनका नाम लिया जाए
वहीं प्रेम का दरिया लहराए
ना कोई वादा ना कोई कसमें
बस प्रेम था दोनों के बस में

#शांडिल्य

Wednesday, October 1, 2025

राधा के बिना अधूरे श्याम
जैसे सूरज बिना नहीं सुबह की शाम
ये प्रेम है दुनिया से न्यारा
जहाँ कृष्ण वहाँ राधा का सहारा

बंसी की धुन पे नाचे राधा
प्रेम का रंग है सबसे ज्यादा
श्याम के संग वो जब भी आई
फिर प्रेम की बारिश छा ही गई

#शांडिल्य

Sunday, September 28, 2025

सुनो,
आखिर क्यों तुम्हे देख कर
सिर झुक जाता है मेरा,
क्या तुम हो
जिसकी मैं इबादत करने लग जाता हूँ,
तुम्हे देख कर मैं क्यो तू हो जाता हूँ
ऐसा लगता है जैसे
तुम्हारे जिस्म में मैं रूह हो जाता हूँ,
जानते हो ना तुम
तुम्हे देख कर मैं
पागल ही हो जाता हूँ,,,,

#शांडिल्य

Friday, September 26, 2025

कहां फिर मेरे लफ्जो मे आवाज रहती हैं
तुझे ना सोचू तो तबियत इनकी भी नासाज रहती हैं

इल्तजा है शिकवा है शिकायत जिंदगी से
सिर्फ मेरी है वो तो क्यू मुझसे नाराज रहती हैं

जर्रा जर्रा वाकिफ है यू तो मेरी मोहब्बत से 
ना जाने क्यों बेपरवाह मेरी हमराज रहती हैं

#शांडिल्य 

Tuesday, September 23, 2025

कुछ रिश्ते,कुछ लम्हें और कुछ लोग
इनसे हम जितना ज्यादा जुड़े रहते हैं
खोने के बाद उनके लिए उतना ही तड़पते हैं
सोचते हैं शायद जी नहीं पाएंगे उनके बिन
गुजरेंगे नहीं रात दिन कभी भी उनके बिन
मगर फिर भी जी लेते हैं उनके बिन
लेकिन पल- पल उनकी याद में मरते हैं हर दिन

#शांडिल्य

Monday, September 22, 2025

ख़्वाब टूटे कुछ यू जैसे हरे पत्ते टूटे हों साखों से
और देखते देखते हार गया समंदर इन आँखों से

तुम्हें कुछ सुनना नहीं था इसीलिए मैंने कहा नहीं
क्यूँकि मुझे तुमसे कुछ कहना था ना की लाखों से

पूर्णमासी ने जब मन बना ही लिया अमावस्या का
फिर शिकायत क्या और क्यूँ करें अँधेरी पाखों से

#शांडिल्य

Friday, September 19, 2025

जन्मांतरो के लिए मुझे
धारण करने दो तुम्हारा रंग

इसमे ही समाया मुक्ति
का वास्तविक मंत्र 

जप , तप , ध्यान
इसी मे अवशिष्ट है ,

प्रेम बिन तो जीव
प्राण तत्व विहीन है 

तुम्हारे प्रेम के बिन तो
मुझे संसार भी स्वीकार्य नहीं 

#शांडिल्य

Thursday, September 18, 2025

आएंगें गुजरे लम्हें याद, ये वक़्त गुजरने दो,
नम होंगे दिले-ज़ज्बात,गिरकर संभलने दो।

शायद उन्हें तलाश थी, किसी और राह की,
छोड़ों अब उन्हें, उसी राह पर ही चलने दो।

मोड़ मुड़ते रहे सफर में,क़दम-क़दम पर वो,
पीछे छूटे हर मोड़ से,उन्हें खुद ही लड़ने दो।

#शांडिल्य

Wednesday, September 17, 2025

संभलना था हमें,,
साथ फिसलते चले गए,,
ना चाहा फिर भी,,
उसकी चाहत में संवरते चले गए,,
अंज़ाम मालूम था,,
फिर भी आगे बढ़ते चले गए,,
तिनका तिनका जोड़ा था ख़ुद को,,
दूरियों में बिखरते चले गए,,
अब तकलीफ़ ये नहीं कि दूर हैं,,
पास रह कर भी बिछड़ते चले गए,,

#शांडिल्य

Monday, September 15, 2025

नशीली आँखों से
तुम मुझे देखती हो
आँखों से मुझे तुम
अपना बना लेती हो
दुनिया को भुला कर तुम
आग़ोश में मुझे छुपा लेती हो
ये कैसी उलझन हुई
जो सुलझती नहीं मुझसे
उलझता हूँ तुमसे
फिर भी उलझता नहीं
साँसे तेज हुई जा रही
और धड़कन करती शोर
थाम ले मुझे अब तू
मुझपे कहां मेरा जोर

#शांडिल्य

Friday, September 12, 2025

कभी-कभी शाम 
ऐसे भी ढ़लती है
जैसे किसी दुल्हन का
घूंघट उतर रहा हो
हौले हौले झांक रही 
कजरारी अँखियां
शरमाई हुई
सीने से उठ रहा है
प्यार का खुमार 
धीरे धीरे
वही ख्वाब की रात है
रास्ते भी वही
इंतज़ार में सिमटी
हुई शाम है
ये सफर है मेरे इश्क़ का
न दयार है न क़याम है

#शांडिल्य

Thursday, September 11, 2025

स्पर्श तुम्हारा
जैसे जीवन धारा
है जग सारा... 

खिलती कली,
कर्णप्रिए काकली,
खुशी विरली... 

मैं डूब चला,
हूँ सबकुछ भुला,
स्पर्श मिला... 

स्पर्श तुम्हारा
जैसे जीवन धारा
है जग सारा...

तेरे नयनों के 
स्पर्श बिना 
मेरी हर रचना अधूरी है 

तुम्हारा स्पर्श 
मेरे लिए एक काव्य है 

#शांडिल्य

Wednesday, September 10, 2025

नैनो मे भरकर चांद के दीदार की हसरत 
आसमान को एकटक निहारती वो रात
गुमसुम सी खामोश सी वो रात

ओढ़कर अंधेरे की स्याह,चादर
चाँद का इन्तजार करती वो रात 
गुमसुम सी खामोश सी वो रात

बावरी है निरी पगली है
शायद नही पता उसे ये बात
रोज रोज कब होती है 
पूर्णिमाकी चाँद रात,,

झेलना पडता है चाँद
और रात को भी विरह का ताप
खलनायक की तरह जब मध्य
आ जाती है अमावसकी स्याह रात
वो रात खामोश सी वो रात

करती है सारी रात चाँद का इन्तजार
चाहे चाँद आये या ना आये
उसे तो रहता है बस चादॅ का इन्तजार

जाने कितनी सदियो से झेलते आ रहे है 
दोनो विरह का संताप मानो नियति है 
इन दोनो की या है कोई श्राप.....
वो रात खामोश सी वो रात .....

#शांडिल्य

Monday, September 8, 2025

राधा! तुम-सी तुम्हीं एक हो,नहीं कहीं भी उपमा और
लहराता अत्यन्त सुधा-रस-सागर,जिसका ओर न छोर 

मैं नित रहता डूबा उसमें,नहीं कभी ऊपर आता
कभी तुम्हारी ही इच्छा से हूँ लहरों में लहराता॥

सदा, सदा मैं सदा तुम्हारा,नहीं कदा कोई भी अन्य
कहीं जरा भी कर पाता अधिकार दास पर सदा अनन्य

#शांडिल्य

Saturday, September 6, 2025

सभी राधा मोहन को मिलती कहाँ हैं।
किस्मत सभी की चमकती कहाँ है।

मोहब्बत की कश्ति भटकती भंवर में,
सभी नाव साहिल पे लगती कहाँ है।

कहानी रवानी की,दरिया उमर की, 
ये फानी जवानी ठहरती कहाँ है।

जी भर के इकरार इजहार करलो,
सफर में मोहब्बत के मंजिल कहाँ है। 

#शांडिल्य

Thursday, September 4, 2025

पीली चुनर सिर पर ओढे देखो वो मुस्कुराई 
सखियों के संग करने ठिठोली बागों में वो आई

लहर लहर लहराए सरसों देख हवा शर्माए
देखो देखो ऋतुराज बसंत ऋतु ये आई
देखके अंबर भी मानों अब लेता इनकी बलाई

हरियाली से बिखरी धरा पर खुश्बू है महकाई
मानों धरा के यौवन ने ली फिर से है अंगड़ाई

#शांडिल्य
मंद-मंद पुरबैया बहके,बनके मलय बयार
बन बसंत लहराऊं मैं तो, जैसे अमुआ की डार

मन मुरझाया खिल खिल जाये,पाकर तेरा प्यार
स्वच्छ सरोवर सी बन जाओ,मस्त मलिन इक नार
मिलन सफल हो आज हमारा,बनके एक बहार

पग पग,पल पल खुशियां महकें,बनके गुल कचनार
फगुनी बसंत सा मैं आऊंगा,महके यह संसार

#शांडिल्य

Tuesday, September 2, 2025

दिन चिकने अरु रात सुहानी,धूप दीवानी हो गई 
शीत ग्रीष्म की हुई सगाई,ऋतुराज अगवानी हो गई 

वन उपवन गदराये यौवन,आम्र मंजरी स्वर्णमयी 
कोयल बोल प्रीत के बोले,स्वर बड़े ही कर्णमयी 

टेसू दहक रहे कानन में,खेत मेड़ पर भी फूले 
खड़े सेमरा मुकुट पहिन कर,लगते हैं जैसे दूल्हे 

#शांडिल्य

Monday, September 1, 2025

उमड़ घुमड़ कर अंतर्मन में
बन जाऊं उत्साह उमंग
कामनाओं की शुभता से
भरूं खुशियों के नवरंग

दृष्टि के आलोक में सदा
शीर्षक बन सामने आऊं
गीत के भव्य छंद सजाकर
स्वरों का लय बन गाऊं

मुस्कान बन संप्रेषण की
बनूं संवाद की प्रेरक भाषा
अभिव्यक्ति का सेतु बनना ही
है मेरे जीवन की अभिलाषा

#शांडिल्य

Saturday, August 30, 2025

कभी मधुर मुस्कान क्षणिक-सी
कभी होंठ पर कंपन होता 
जैसे गहरी निद्रा में शिशु 
हर क्षण अपना रूप बदलता

लाया है संदेश मिलन का 
दूर क्षितिज का धुंधला कोना 
दुल्हन सरीखी दिशा सिमटकर
छेड़ रही चाहों की वीणा

सीले आंगन में अंतर के 
धूप आज वर्षों में छाई 
प्रियतम मिलने को आते हैं 
सृष्टि इसी से है खिल आई 

#शांडिल्य

Friday, August 29, 2025

प्रियतम के दर्शन की आशा 
पीतवर्ण को करें गुलाबी 
जैसे सुरज की किरण सुनहरी
निकल खिला दें कमल गुलाबी

नैननकी अनकही वेदना
निर्झरबन‌ कपोल को चूमें
धारा का अल्हड़पन उरकी
सीमाओं को बढ़कर चूमें

अलसाई बोझिल पलकोंका 
दिल-थिर खुलना और झपकना 
अंबर से दो-दो तारों का 
टूट- टूट कर गिरना

#शांडिल्य

Thursday, August 28, 2025

देख कर तेरी वो चमकती आंखें, 
जैसे बिन कहे ही सब कुछ कह देती हैं। 

धीरे से तेरे होठों का हिलना,
बिन बोले ही सब कुछ कह जाना। 

तुम कुछ कहती नहीं हो, न मैं कुछ बोलता हूं
हां हम चुप रहते हैं, सिर्फ देखते हैं तुम्हे। 

मगर मेरा दिल दिल से बातें करता है
हजारों मील दूर रह कर गले मिलता है। 

#शांडिल्य

Tuesday, August 26, 2025

छोड़ो शिकायतें चलो आज कुछ लिखता हूं,
कुछ आधी अधूरी, सूरज सी चमकती
कुछ जागी सी, कुछ अलसाई सी,
सुबह की कलियों में लिपटी मेरे प्यार की बातें
वो मेरा धीरे से अपनी आंखों का खोलना
और सामने तेरा मुस्कुराता चेहरा नज़र आना
जैसे अभी चमका हो सूरज मेरे दिल के आंगन में

#शांडिल्य

Sunday, August 24, 2025

सूरज ऊपर टंग गया,जैसे नभ का भूप  
मुंडेरों पर चढ़ गई, रजत सरीखी धूप। 

पत्ती नर्तन कर रही रिस-रिस जाये ओस 
ठंडी-ठंडी हवा भी पंहुच गई कई कई कोस। 

नमी ओस की पड़ रही,धुल गई सारी धूल,
सदा नहाये से लगें, खिल-खिल करते फूल। 

#शांडिल्य

Saturday, August 23, 2025

देख कर तेरी वो चमकती आंखें,
जैसे बिन कहे ही सब कुछ कह देती हैं

धीरे से तेरे होठों का हिलना,
बिन बोले ही सब कुछ कह जाना,

तुम कुछ कहती नहीं हो, न मैं कुछ बोलता हूं
हां हम चुप रहते हैं, सिर्फ देखते हैं तुम्हे 

मगर मेरा दिल दिल से बातें करता है
हजारों मील दूर रह कर गले मिलता है

#शांडिल्य

Thursday, August 21, 2025

बिन कहे अल्फ़ाज़ जब अपना पता देने लगे
बिन लिखे खत खुद ब खुद अपना पता देने लगे

अनछुआ एहसास था वो अनबुझी ही प्यास भी
गीत धड़कन से निकल अपना पता देने लगे

कुछ न कह पाई जुबां पर आंख ने सब कुछ कहा
अनकहे थे लफ्ज पर अपना पता देने लगे

#शांडिल्य

Wednesday, August 20, 2025

'ओए 'सुन तेरे' बिन—  
ये जीवन एक अधूरा प्रश्न है,  
मानो ऋतु बिना मेघ,  या
मेले बिना रंगों की रश्मि।  
~"मेरी.....""""
हर धड़कन तेरा नाम जपती है, 
तेरी बाहों की शरण में ही  
मैंने सृष्टि का सुन्दरतम स्वप्न देखा...
सुनो—  
अगर कभी लौट सको तो  
मेरी आत्मा की प्यास बुझाने आ जाना,  
सिर्फ मेरे लिए...!!!

#शांडिल्य

Sunday, August 17, 2025

"रविवार की सुबह —"

बिस्तर अभी तक
तेरी नींद से महक रहा है,
धूप खिड़की से नहीं —
तेरी यादों से छनकर आई है।

किताब जो खुली है,
उसमें कुछ अल्फ़ाज़ हैं
जो मैंने नहीं लिखे...
शायद वो तेरे ख्वाबों से उतरे हैं।

मेरा कप नहीं —
तेरा इंतज़ार ठंडा हो रहा है,
और ये कमरा…
अब भी तुम्हारा नाम लेता है
हर साँस में।

सच कहूं,
ये रविवार की सुबह नहीं —
तेरे बिना एक
अधूरा दिन है।

#शांडिल्य

Thursday, August 14, 2025

सुनो,
हमसफ़र नहीं हो तुम
फिर भी कहीं न कहीं
सफर कर रहे हो तुम मेरे साथ हमेशा।
 
कभी बर्फीली पहाड़ियों पर,
कभी आसमान की बुलंदियों पर,
कभी मेरे सामने बैठे हो
तो कभी दूर खड़े मुस्करा रहे हो।

कभी दुनिया की भीड़ में
कभी रात की तनहाई में
कभी मेरी यादों में, कभी मेरे ख्यालों में।

#शांडिल्य 

Wednesday, August 13, 2025

"ए सुनो ,

मैंने व्रत नहीं रखा...
क्योंकि मैंने तुझे किसी देवता से नहीं माँगा —
मैंने तुझे अपने भाग्य की सबसे सुंदर चुप्पी में पाया है।
मैं मंदिर नहीं गया,
पर हर सोमवार तेरे नाम से उपवास हुआ —
न खाने से…
बल्कि तेरी यादों से,
जो रोटी से भी ज़्यादा ज़रूरी थीं। 
"मैं शिव से ये नहीं माँगता कि तू मेरी हो,
मैं तो बस कहता हूँ —
जिस जन्म में तेरे होंठों पर "ॐ" उभरे,
उस जनम में —
मैं तेरे पहले 'हर हर महादेव' की ध्वनि बन जाऊँ।

#शांडिल्य

Monday, August 11, 2025

बस यूँ ही गुज़र रहा है जो
वो सफर हूँ मैं
मंज़िल से होकर बेख़बर 
भटक रहा हूँ मैं
ग़र मुलाक़ात हो तो बताना
तलाश रहा हूँ मैं
साँसें उखड़ने लगीं हैं अब
यादें भी धुंधली पड़ने लगी हैं 
किस्मत अपनी बनाने को 
अब भी लड़ रहा हूँ मैं।

#शांडिल्य

Sunday, August 10, 2025

इन्द्रधनुष के रंगो सी है बचपन की वो यादे 
नहीं लौट कर आना चाहे कर लें कितनी फरियादें। 

गिल्ली डंडा आइस पाइस, पोसम पा का खेल 
पल में झगड़े पल में कर ले, अपने साथी से मेल। 

धूप की चिन्ता ना वर्षा की ,और न सर्दी डराए 
मन चंचल भौरा बन देखो, हर पल उड़ता जाए। 

#शांडिल्य

Wednesday, August 6, 2025

सुनो ना....
जानता हूँ,
तुम क्यूँ वो नहीं लिखती 
जो मैं पढ़ना चाहता हूँ,
तुम क्यूँ वो नहीं कहती 
जो मैं सुनना चाहता हूँ,
डरती हो ना !
कि हृदय से प्रेम छलक न जाए
कहीं तुम्हारे अनकहे शब्द मुझसे
प्रेम की रीत कह न जाए
कहीं तुम्हारे अनछुए स्पर्श
मुझे महसूस न हों जाए

#शांडिल्य 

Tuesday, August 5, 2025

मेरी थाम लो तुम हृदय डोर सजनी
न पाओगी तुम प्रेम का छोर सजनी। 

बँधी दिल के बन्धन हमारी उमंगें
कभी भाव मन की कटी जो पतंगें 

भिगोती हैं पलकें प्रणय कोर सजनी
चलो हाथ थामे छुएं नील नभ को

नहीं रास आता पिया साथ सबको
यहाँ दांव पेचों का है शोर सजनी। 
मेरी थाम लो तुम हृदय डोर सजनी।

#शांडिल्य

Friday, August 1, 2025

कितने समय हो गए है, 
तुमसे रूबरू हुए 
ग़र ,, सामने आ जाओ तो 
शायद कुछ बात बनें
निगाहों से जो छू लूँ ., तुम्हें,
तो जीने के हालात बनें,
गुलमोहर भी गिर चुके है,, 
इंतज़ार में देखो,,
तुम आओ, तो फिर से बागबां बनें ... !

#शांडिल्य

Thursday, July 31, 2025

एक अजनबी से मुलाकात हुई 
धीरे-धीरे कुछ_बात हुई 

अल्फाज़ बयां उसने जो किये 
दिल को वो मेरे छू से गए।

जादू सा जैसे छाने लगा 
सपनों में अब वो आने लगा
निगाहों को अब वो भाने लगा...

#शांडिल्य

Tuesday, July 29, 2025

कुछ बातें हमसे सुना करो,
कुछ बातें हमसे किया करो,

मुझे दिल की बात बता डालो
तुम होंठ ना अपने सिया करो,

जो बात होंठों तक ना आए
वोह निगाहों से कह दिया करो,

कुछ बातें कहना मुश्किल है
तुम चेहरे से पढ़ लिया करो,

#शांडिल्य

Monday, July 28, 2025

एक शोर सुनाई देगा 
मन का चोर दिखाई देगा

तुम रुकना नही 
तुम झुकना नही

तुम चलना कुछ ऐसे 
नदियाँ चलती हो अंचल से जैसे

तुम थकना नही 
तुम बहकना नही

तुम लिखना मन से मन को 
जैसे मीरा लिखती है वृन्दावन को..!!

#शांडिल्य
दो तन एक प्राण 
प्रणय का करें दोनों मान सम्मान। 

प्रेम का यही श्रृंगार 
अलंकार और उपहार ।

वादा हो जैसा राम ने किया सीता से 
एक पत्नी व्रत निभाऊं जीवन भर तुमसे। 

नहीं जो किया दुष्यंत जैसे 
भूल जायें किया वादा शकुन्तला से ।

#शांडिल्य

Saturday, July 26, 2025

प्रणय का बंधन है पवित्र
दो अनजान बनते मनमीत
मेरे शब्द तेरे स्वर मिलकर
बन जायें जीवन संगीत

सुर्ख गुलाब प्रतीक है
सुख के शबाब के साथ
दुखों के काटों का वादा है,
मिलकर समस्याएं सुलझाने का

प्रणय का करते इजहार
वादों, कसमों से इकरार
कि वादा है जीवन भर 
रहेगा मधुर व्यवहार

#शांडिल्य

Thursday, July 24, 2025

सुमन सरीखी याद तुम्हारी,
केवल यूँ हीं स्वीकार नहीं
इस एक धरोहर के सम्मुख,
जँचता कोई उपहार नहीं

तेरे गीतों को गाने से,
यह हदय कमल खिल जाते हैं
तन्हाई की परछाईं में,
हमतुम दोनों मिलजाते हैं 

बातें होती हैं नयनों से,
जब अधर-अधर सिल जाते हैं
यह विरह-मिलन का महाकुंभ,
अब समझेगा संसार नहीं

#शांडिल्य

Tuesday, July 22, 2025

महकी-महकी याद तुम्हारी अनुरागी मन में ।
छलक पडे़ आँखों से आँसू अगन लगी तन में।।

ताक रहा विरहाकुल-व्याकुल आयेंगे बादल।
नेह राग की पाती पाकर गायेंगे बादल।।

उतर गगन से चाह बिजलियाँ चमकी आँगन में।
महकी-महकी याद तुम्हारी अनुरागी मन में।।

#शांडिल्य

Monday, July 21, 2025

घटपट नवल धवल
मृदुल मधुर विचार प्रवाह
स्नेहिल व्यवहार तरंगिनी
सकारात्मकता ओज अथाह

स्वच्छ स्वस्थ अंतर काय
कदम चाल मंगलता ओर
जीवन पथ प्रतिक्षण
अनुभूत अनंत अनुराग

दिग्दर्शन सृजन आरेख
दिव्यशब्द अर्थ पराग
अभिस्वीकृत आराध कामना
मनोभूमि परम आनंद ठोर
पद्मजा श्री चरणों में,अरुणिम भोर

#शांडिल्य

Friday, July 18, 2025

बन के चितचोर कोई आये तो 
कोई मेरा भी दिल चुराये तो

जान हम भी हैं प्यार के काबिल
बात कोई ये मान जाये तो

वास्ते मेरे भी घरौंदा इक
अपने दिल में कोई बनाये तो

कोई रूठे भले मेरे से पर 
जब मनाऊँ मैं मान जाये तो

हाथ बढ़ कर के थाम ले  मेरा
मेरा जब जब पाँव लड़खड़ाये तो

#शांडिल्य

Thursday, July 17, 2025

एक आस हृदय लिए, और अधरों पर प्यास।
प्रेम शब्द का हे सखे, पढ़ रहा मैं इतिहास ।

प्रेम जाल में फँस गया, यह पागल मन मोर।
चित्त चुराकर ले गया,वह प्यारा चितचोर।

तुम हो मेरी प्रेरणा, तु ही हो मेरा प्यार।
तेरी सुधि में खो गया, मेरा दिल यूँ बिमार।

#शांडिल्य

Wednesday, July 16, 2025

यूँ रंगीन कहानी हो तू मेरी दीवानी हो।  
तब मैं राजा कहलाऊँ जब तू मेरी रानी हो।   

काश वो दिन भी आ जायें रोज़ाना मनमानी हो।  
मन फूलों सा खिल उठ्ठे ऐसी भी शैतानी हो।

तू ही छेड़ ग़ज़ल कोई फिर महफ़िल मस्तानी हो।  
जब भी बिछड़ें हम इन आँखों में पानी हो। 

#शांडिल्य

Tuesday, July 15, 2025

लेकर अंगड़ाई भोर आई
न ख़्वाब तेरा न नींद आई

तूने मेरी यू निंदिया उड़ाई
जिधर देखू  नज़र तू आई

पल में मेरी, पल में पराई
सब तेरे लफ्ज़ो की चतुराई

अगन कैसी दिल मे लगाई
तुझ बिन सोचे न कोई पाई

#शांडिल्य

Saturday, July 12, 2025

सृजन सुहाने सभी हों, सरस सु-सौंदर्य भी हों।
सु-मधुर कल्याण-कारी, भुवन भरे.. भाव धारी॥

कृति अपनी कामना से, शुभ रखता भावना से।
कुशल सरोकार..जो है, पटु..रचना-कार वो है ॥

सजग सु-निर्माण भाते, हृदय..क्षुधा बाँध पाते।
कुशल सरोकार ध्यावें, प्रभु सत-उद्धार भावें॥

#शांडिल्य 

Sunday, July 6, 2025

आओ किसी का यूँही इंतजार करते हैं,
चाय बनाकर फिर कोई बात करते हैं!

उम्र सांठ की हो गई हमारी,
बुढ़ापे का इस्तक़बाल करते है!

कौन आएगा अब हमको देखने यहां,
एक दूसरे की देखभाल करते है!

जिंदगी जो बीत गई बीत गई,
बाकी बची मैं फिर से प्यार करते हैं!

#शांडिल्य

Friday, July 4, 2025

मनभावन से भाव सृजन का 
अनुपम गीत बन गई तुम..!

छेड़ा मन का वाद्ययंत्र 
एक सुर संगीत बन गई तुम..!

सुघड़ प्रीत का थाल सजाये 
ड्योढ़ी पर ही ठिठकी हो,

उर-पट खोल बलैयां लेलूँ
सांची मीत बन गई तुम..!

#शांडिल्य

Wednesday, July 2, 2025

कुछ न कहा कभी आपने, हमने फिर भी सुन लिया ।
इन हजारों चेहरों में, एक तुम्हें बस चुन लिया ।।

आपके खातिर हम जिए, आपके खातिर ही मरे।
हमने कुछ सोचा ही नहीं, दुनिया से अलग हम क्या करें।।

फूल कई हैं गुलशन में, एक तुम्हें बस चुन लिया ।
कुछ न कहा कभी आपने, हमने फिर भी सुन लिया ।।

#शांडिल्य

Tuesday, July 1, 2025

प्रेम की असीमता तुम्हें स्पर्श करती हुई 
मेरे रोम रोम को भिगो रहीं हैं 

मन के भाव शांत तुमसे आबद्ध 
हृदय का आलिंगन कर रहीं हैं 

मुक्त स्वर  से अपने नाम में 
सदा तुम्हें पुकार रहीं हैं 

जीना है एक जिंदगी जहां संग तुम हो 
मेरी एक यात्रा है जिसका अंत तुम हो 

#शांडिल्य

Saturday, June 28, 2025

तेरी कंचन कंचन काया सिन्दुरी 
तेरी चंचल_चंचल छाया सिन्दुरी 
रात भले कितनी भी चांदी बरसी हो 
सुबह सुबह मन को बस भाया सिन्दुरी 
तेरे अक्स से जल हो आया सिन्दुरी 
माथे की बिन्दी मै लाया सिन्दुरी 
ओंठ भले हो तेरे सुर्ख मलाई से 
श्याम वर्ण पर ठप्पा आया सिन्दुरी 
श्वेत हंस सुबह उड़ हो आया सिन्दुरी 
हरी घांस शबनम जम आया सिन्दुरी 
कलियां तेरी आँखो जैसी गुलाबी हैं 
हिम खण्डों पे स्वर्ण पताका सिन्दुरी 
मंदिर से जैसे दिया हूँ लाया सिन्दुरी 
तूने घर को भोर सजाया सिन्दुरी 
जाने ख्वाब य़ा सच मे कोई हकिकत है 
जब दिल जला धुआं बस आया सिन्दुरी

#शांडिल्य

Wednesday, June 25, 2025

पुरुष में प्रेम अनंत ब्रह्माण्ड जितना होता है, 
जबकि मौन होता है सागर की तरह, 
भाव से भरा वह भी चाहता है 
बालक सा चंचल होना, 
नदियों की तरह बहना
पर .....ये संसार पुरुष को ऐसा देखने की आदी नहीं, 
अंततः वह इन सब को दबाए रख कठोर 
होने का दिखावा करता है...!!

#शांडिल्य

Tuesday, June 24, 2025

तेरे भीगे बदन की खुशबु से
लहरें भी हुयी मस्तानी सी

तेरी ज़ुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी

यह रूप का कुंदन देखा हुआ
यह जिस्म का चन्दन महका हुआ

बिखरा हुवा काजल आँखों में
तूफान की हलचल साँसों में

ये नरम लबो की ख़ामोशी
पलकों में छुपी हैरानी सी

#शांडिल्य

Saturday, June 21, 2025

मिलने के लिए मुलाक़ात-ज़रूरी तो नहीं।       
भीगने के लिए बरसात-ज़रूरी तो नहीं ।।

रौशन तेरे ख़यालों से है  दुनिया मेरी, 
रोशनी के लिए चाँदनी रात-ज़रूरी तो नही।

रूह से रूह का रिश्ता है - टूटेगा नही, 
अब हर रिश्ते में बारात -ज़रूरी तो नही ।

#शांडिल्य

Tuesday, June 17, 2025

उलझ गया है वो फिर से उन्ही सवालों में 
और जवाब बंद हैं सारे ही उनके तालों में ।

दर्द बांटे तो तुम्हें प्यार भी मिल जायेगा 
भीड़ आज बड़ रही है बस शिवालों में ।

छटेंगी धुंध लो दिनकर भी निकल आए हैं 
ढूँढ  ही लेंगे तुम्हें हम आज घने जालों में।

#शांडिल्य

Tuesday, June 10, 2025

वादियों में ठंडे कोहरे की तरह, ज़हन में उतरता है कोई
वसंत के फूलों की तरह, मन में महकता है कोई,

धुंध बन रही फिर किसी हसीं मुलाकात का ताना बाना
कड़ाके की ठंड सा बदन में उतरता है कोई

इश्क की मस्ती सा रूह में ढलता है कोई
साथ महबूबा का पाकर बिन पिए बहकता है कोई

#शांडिल्य

Wednesday, June 4, 2025

प्रेम चाहने वाली स्त्री 
सारी शिकायतें करके, 
उन्हें अपने जूड़े में बाँध देती हैं

और छोड़ती हैं  दो लटें - 
 प्रेम और आलिंगन की 

वो चाहती है आप उँगलियों से सँवारें 
उनकी यह दो लटें और सारे गिले-शिकवे  
गजरे में फँसा कर दूर कर दें।

#शांडिल्य

Monday, June 2, 2025

मौन अधर,क्या लिखूँ पीर जो मंत्रहीन
निर्मोही प्रियतम,चलत यायावरी हीन

शब्द विहीन,संज्ञा हीन,है स्व में लीन
शोरगुल से दूर,बेचैन मन है गतिहीन

दामिनी तीर,निर्झरिणी नीर,तरंग हीन
अशांत चित्त,किस निमित अंतरहीन

दरस दो मेरे हमजोली,बन संकोचहीन
प्रतीक्षारत मौन अधर,हो जाओ लीन

#शांडिल्य

Friday, May 30, 2025

मखमली कोहरा गुलाबी चेहरा
प्यासी निगाहों पे सर्दसा पैहरा

गुनगुनी धूपसी मीठी यादें
दिलमें इक हूल उठायें गहरा

शाख पे शबनम लिपट युँ जाती है
ज्यूँ पुरवइया पहाड़ों पे गाती है

पायलकी झंकार दे पुकारले अबतो
कुछ हसीं लम्हे उधार दे अबतो

सब वादे चल असल करलें 
चल पहाड़ों को अपना घर करले

#शांडिल्य

Thursday, May 29, 2025

आत्मिक प्रेम है तुमसे मानसिक प्रेम है तुमसे,
देह पूर्णतः गौण है इसमें स्वार्थ भी मौन है इसमें !!

दैहिक स्पर्श से अधिक मानसिक स्पर्श है तुमसे,
समक्ष उपस्थित नहीं हो स्मरण संवाद है तुमसे!!

आर्कषण नहीं तुमसे आत्मा के नव कोपल हो,
मन की मरुभूमि में स्थित दुर्लभ श्वेत कमल हो!

#शांडिल्य

Tuesday, May 27, 2025

हसीन ख्वाबों सी मुकम्मल 
हकिकत तू मेरे जिंदगी की

मुलाकात भले ही मुमकिन नहीं
मगर जुड़े हुए हैं दिल से दिल ए हमनशीं

यादों पर पहरे तेरे अक्स के सभी
ओर जहन में तेरा नूर आफरिन

मुलाकातें तुम से ख्वाबों में रोज की
ओर नींद से दुश्मनी हमारे हर सुबह की

#शांडिल्य

Sunday, May 25, 2025

खास नही कुछ भी यहा
सब छूट जाना ही है यहा
फिर काहे सोचे इतना यहा
रह जाना है जब सब यहा

सोच-सोच क्यो कुंठाये यहा
प्रकृति का सिर्फ सब है यहा
मूल प्रकृति अपनी जाने यहा
यही उद्देश्य जीवन का है यहा

#शांडिल्य

Saturday, May 24, 2025

तू ही सुकून,तू ही आदत है मेरी,
तुझसे मेरी हर ख़ुशी,तू ही राहत  है मेरी.!

जिसे कभी खो न सकूँ...
तू वो चाहत है मेरी...!

अब न कोई ख़्वाहिश बची है.
तू दुआ में मिली सबसे बड़ी इबादत है मेंरी.!

#शांडिल्य

Friday, May 23, 2025

रात अब गहरी हो चली पलकें भारी है,
आंखों पर मगर ख्वाबों की पहरेदारी है..

मंजिल के दीदार में अभी वक्त लगेगा,
उसी वक्त के इंतजार में सफ़र जारी है

हालात हक में हों या खड़े हों मुकाबिल 
हर जंग में फतह करना मेरी जिम्मेदारी है

#शांडिल्य

Thursday, May 22, 2025

एक चांद है आसमान में
दूसरा बाहों में मेरी..

एक घटा भादो के बादल
दूसरा जुल्फों में तेरी..

एक भूलभुलैया आँखो में मेरी
दूसरा आंखों में तेरी..

एक नशा गालिब की ग़ज़लें
दूसरा बातों में तेरी.....!!!!

#शांडिल्य

Tuesday, May 20, 2025

मेरे तुम्हारे दरमियां 
कैसे कहूँ कोई रिश्ता नहीं, 
जब भी लिखता हूँ, 
कलम से बयां तुम हो जाती हो,
रूह से महसूस होती हो मुझे, 
हर वक्त हर लम्हे में, 
कैसे कहूँ तुम्हे, 
तुम मेरी कुछ भी नहीं... ....??💞

#शांडिल्य

Saturday, May 17, 2025

नज़ाकत भरी है अदा आपकी,
हिफ़ाज़त करे अब ख़ुदाआपकी।

पिए बिन नशा हो रहाआज तो,
निगाहें बनी मयकदा आपकी।

हज़ारों नज़र ख़ूबसूरत मगर,
अदाएँ सभी से जुदा आपकी।

भुलाना नहीं ज़िंदगी में कभी,
हमें चाहिए बस रज़ा आपकी।

#शांडिल्य

Thursday, April 17, 2025

खिली सी रंगत पर,हजारों रंगीन अफ़साने लिखे 
बेगैरत सादगी आ कर क्यों,मौसम बिगाड़ देती है ??

खिली हो धूप-छांव में,तमस में चांदनी का जलवा
खामोशी छेड़ती है राग,नीरव में गजल का मसला

अनजान सी रागिनी आकर,तरन्नुम बिगाड़ देती है
बेगैरत सादगी आ कर क्यों,मौसम बिगाड़ देती है

#शांडिल्य

Saturday, April 5, 2025

कोई ख्वाब जैसे 
पलकों को छूकर जाए
कोई राही जैसे 
अपनी मंजिल से लौट जाए
कोई दरिया जैसे
समंदर में जाकर खो जाए
तुम और मैं ऐसे ही तो हैं
ओस की एक बूँद जैसे
हरे पत्तों की गोद में छुप जाए
कोई किरण जैसे
दूब से लिपटकर चटकीली हो जाए
कोयल की कूक जैसे
तुम और मैं ऐसे ही तो हैं

#शांडिल्य

Saturday, March 29, 2025

जिस्म मिलता हैं ज़ब रूह से तुम्हारी
दिल में मेरे हल्का हल्का सा सरूर छाने लग़ जाता है

दिल धड़कने लगता है तुमसे से मिल जाने पर
हुस्न पर तुम्हारे प्यारा सा निखार आने लगता है

खोने लगते है ख़्वाबों की दुनियाँ में हम दोनों
सपनों में मिलने का खुमार सा छाने लगता है

जुल्फें संवरने लगती हैँ तुम्हारी प्यार बहकने लगता है
अँखियो में तुम्हारी मोहब्बत का काजल घुलने लग़ता है

#शांडिल्य

Thursday, March 20, 2025

कुछ पल के लिये, साथ रह लो मेरे,
कुछ कदम ही सही, साथ चल लो मेरे... 

उन कुछ पलों मे ही, मेरे मायने बदल जाऐंगे, 
तुम्हारे एक साथ से, मेरे पैमाने बदल जाऐगें...

तुम्हें मुझसे क्या मिलेगा, इसका ना मुझे पता है, 
मेरे साथ तुम रहोगे, यही मेरी पूर्णता है...

#शांडिल्य

Wednesday, March 12, 2025

तारों भरी विभावरी, पर दिखता ना चांद
बार बार मुझसे कहे, कुछ अंतर मन नाद

रात बात हो प्रेम की, कहती पवन पुकार
नींद ना आती जागता, किस विरही का प्यार

मधुरस भीनी रात हो, मधुर मीत के संग
छूकर पावन प्रीत से, कुशमित करता अंग

#शांडिल्य

Thursday, March 6, 2025

सौंदर्य, सुगंधित,अप्रतिम तुम,
लावण्य,रूप का,संगम तुम,

कुंतल,केश,चपल नयना तुम,
साँवली,सलोनी,सबला तुम,

रूप,माधुर्य का,मेल हो तुम,
तीखे,नयनों का,जाल हो तुम,

भीगे होठों के,जाम हो तुम,
सरल,सरस,स्निग्धा,हो तुम,

प्रेम, त्याग की मूरत हो तुम,
लय और ताल की सरगम  हो तुम,

~~~~ #शांडिल्य

Sunday, March 2, 2025

कोई जैसे मुझे पुकार रहा है,दिल में हलचल है
चोर नजरों से निहार रहा है, दिल मे हलचल है

बादल शबाब पर हैं,घटाओं का रंग गहरा रहा है
वो जुल्फों को संवार रहा है, दिल मे हलचल है

कोई मीठी सी धुन आ रही है,छनछन,छनछन
जैसे पायल को उतार रहा है, दिल मे हलचल है

#शांडिल्य

Monday, February 24, 2025

रूठ जाये एक जो इक पास होना चाहिए
हरघड़ी जीवनमें कोई आस होना चाहिए

प्यार भी होता मुक़म्मल एक तरफा कब यहाँ
इश्क़ का दोनों तरफ एहसास होना चाहिए

देखते ही ठहर जाए चंचला सी ये नज़र
भीड़ में कोई तो चेहरा ख़ास होना चाहिए

हर तरफ है रोशनी त्योहार के दिन आ गए
मन के कोने कोने तक प्रकाश होना चाहिए

#शांडिल्य

Saturday, February 22, 2025

क्या लिखू 

तूँ तों बस मेरी रूह का खूबसूरत एक राज है
जिसे सब से छुपा के तुम्हें अपनी धड़कनो में बसाया है

मेरे दिल की बेचैनियो का सुकून हों तुम
मेरे ख़्यालों की मेरी साँसों की तूँ वो मेरी साज है

चुपके_से मिलने आती हों तुम सपनो में मेरे
जब सुबह उठ कर ढूंढता हूँ फिर निशान तेरे

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, February 18, 2025

मन प्रफ़ुल्लित जब हुआ 
तब प्रकट कविता हुई, 
शब्द का मोती चुना जब 
काव्य तब सविता हुई, 

लेखनी मे बंध गयी जब 
बन गयी वो हार जैसा, 
प्रेम का धागा पिरोया,
बन गयी वो यार जैसा,
 
प्यास सुनने की हुआ जब,
काव्य तब सरिता हुई, 
मन प्रफ़ुल्लित जब हुआ,
तब प्रकट कविता हुई।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, February 16, 2025

तुमसे मिलने को दिल ये मचलता रहा
याद में दिल तुम्हारी ही जलता रहा।

कट रही रात तेरी ज़ुदाई में ये
मेरी आंखों से सावन बरसता रहा।

किस कदर संगदिल आपका हो गया
मोम जैसा मेरा दिल पिघलता रहा ।

चांदनी रात दिल को जलाती रही
मेरी हालत पे  ये चांद हंसता रहा।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, February 14, 2025

तेरी याद में ज़रा आँखें भिगो लूँ
उदास रात की तन्हाई में सो लूँ

अकेले ग़म का बोझ अब संभलता नहीं
अगर तू मिल जाये तो तुझसे लिपट कर रो लूँ

आंसुओं की बूँदें हैं या आँखों की नमी है
न ऊपर आसमां है न नीचे ज़मी है

यह कैसा मोड़ है ज़िन्दगी का
उसी की ज़रूरत है और उसी की कमी है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, February 10, 2025

प्रिय। 
सुखद संसार हो तुम और पहला प्यार हो तुम। 
गीत में जो बह रहे हो भावना की धार हो तुम।।

जब पुकारू मैं तुम्हें तो तुम ह्रदय के पास आना
मौन को जो सुन सके प्रिय वो मधुर एहसास लाना

हो अलौकिक नेह की निधि जिन्दगी का सार हो तुम।
गीत में जो बह रहे हो भावना की धार हो तुम।।

~~~~ सुनील #शांडिल्य

Friday, February 7, 2025

प्रिय !!! लिखकर नीचे लिख दूँ नाम तुम्हारा
कुछ जगह बीच मे छोड़ नीचे लिख दूँ सदा तुम्हारा

लिखा बीच मे क्या? ये तुमको पढ़ना है
कागज़ पर मन की भाषा का अर्थ समझना है

जो भी अर्थ निकालोगे तुम वो मुझको स्वीकार
नैन झुके,मौन अधर, कोरा कागज़ अर्थ सभी का प्यार!!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, January 30, 2025

नैना तेरे छैल छबीले
मनमोहक हैं बड़े नशीले
इनमें गहरे राज की बातें
ख्वाबों में  हैं ये बतियाते
बयाँ करते अंदाज़ रंगीले।
जब जब इनमें झांका हमने
खुद को  ही है ताका हमने
सुंदर  हैं  ये बड़े सजीले।
मनमोहक हैं बड़े नशीले ।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, January 27, 2025

इन दिनों घर बसाने की फ़िक्र में   
हरकत तेज हुई है, चिड़ियों की ! 

गजब का हुनर उनका, 
तिनके चुनना,तिनका तिनका जोड़ना, 

बच्चों का पोषण,भविष्य की हिफाजत की फिक्र 
कुछ भी कभी भूलती नहीं चिडिया, 

जिम्मेदारियां अपनी टालती नहीं 
कुछ मौसम बदलने से भी !

~~~~ सुनिल #शांडिल्य
जबसे वो बनने संवारने लगी हैं।
बहुत खूबसूरत वो लगने लगी हैं।।

लगती जन्नत की वह तो हूर जैसी।
सबकी नजर उसपर टिकने लगी हैं।।

धड़कती है धड़कन जब देखे उसे हम।
देखते है तो नजरे बहकाने लगी हैं।।

खुदा का करम है  ग़ज़ब हुस्ना तेरा।
दिन-ब-दिन और‌‌ तू निखरने लगी हैं।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, January 22, 2025

तेरी एक झलक पाने की खतिर ऐसे तरसे  !
जैसे बिन मौसम के ज़मी पे बादल बरसे !

सुबह से शाम हुई तेरे आने के इंतेजार मे !
आंखे ढूब गई दिव्या दर्शन के दीदार मे !

ऐसे जूल्म सितम ना किया करो मेरे साथ ! 
बस दिख ही जाया करो चाहे दिन हो य़ा रात !

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, January 21, 2025

आपकी याद आती रही रात भर
रागिनी गुनगुनाती रही रात भर।

शम्मा बेचैन थी कुछ परेशाँ भी थी
उसकी लौ टिमटिमाती रही रात भर।

एक तन्हा सी शब थी उदासी मेरी
चूडियां खनखनाती रहीं रात भर।

चाँद उलझा रहा उलझनों मेंं कहीं
चाँदनी मुस्कुराती रही रात भर।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, January 17, 2025

तु जरा तो समझ इत़नी भोली न बन,
अब तो आजा तडपता है ये मेरा मन‌।

तुने आने का वादा किया था सनम 
आजा आजा तुझे प्यार की है कसम।।

देखते तेरा रास्ता मेरे ये नयन
तु जरा तो समझ इतनी भोली न बन

तुने सोचा ना वो काम कर दूंगा में 
जिन्दगी को तेरे नाम कर दूंगा में 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, January 9, 2025

शबनम की बूँदे पंखुड़ियों पर चमक रही हैं,
खिल रही हैं कलियाँ फिजायें महक रही हैं |

सुबह की धूप छनकर जैसे हौले से आ रही,
पक्षियों के कलरव से साखायें चहक रही हैं |

सरका क्या ऑंचल धीरे से उसके कंधे से,
ठिठक गयी नज़रें पर एहसासें बहक रही हैं |

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, January 7, 2025

महफ़िल में नशीला खुमार था।
जाम लिए साकी का इंतजार था।

ढलने दो सुरमई शाम को अब
रात में मोहब्बत का इजहार था।

कह न पाये हम अपनी हसरतें,
आज खामोशी लिए इकरार था।

डसता है अकेलापन विष लिए
तेरा गुस्सा ही मेरा एतबार था।

मोहब्बत में भरोसा करना फिजूल,
तड़पती आरज़ू का एक करार था।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, January 3, 2025

हर बात याद आयेगी जब जब याद करोगे,
हर मौज ठहर जायेगी वक्त पे एतबार करोगे।

ताउम्र रिश्ता आखिर यहाँ निभाता है कौन,
दुनियाँ की सच से हो वाकिफ हैरत न करोगे।

गम हजारों दुनियाँ में अपने भी पराये भी,
किसी की 'रूह' को छू लो तो महसूस करोगे।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, January 2, 2025

चलती नहीं लेखनी तुम बिन
सूख गये सपनों के सागर

भावों की नदियाँ सूख गयीं
सूनी है जीवनकी गागर

बिन बरसे तुम चले गयीं
कैसे में खुशहाल दिखूँ

है सजीव जीवन का वो पल
पहली बार जब मिले थे तुम

छोटी सी एक छेड़छाड़ से
प्रेमपाश में बंधे थे तुम

सोच नहीं सकता विछोह में
किससे दिल का हाल कहूं

~~~~ सुनिल #शांडिल्य